RBI MPC Meeting: बजट और ट्रेड डील के बाद पहली पॉलिसी मीटिंग, क्या सस्ता होगा कर्ज?
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Feb 5, 2026, 04:16 PM IST
RBI MCP मीटिंग जारी है। EU और US के साथ ट्रेड डील के ऐलान के बाद यह पहली पॉलिसी मीटिंग है। महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के भारत के पक्ष में ऐसे में रेट कट की उम्मीद बढ़ गई है। शुक्रवार 6 जनवरी को मीटिंग के नतीजों का ऐलान होग।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की फरवरी बैठक पर बाजार और आम लोगों दोनों की नजर है, क्योंकि हाल ही में पेश हुए बजट और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद यह पहली बड़ी पॉलिसी समीक्षा है। अब सवाल है कि क्या RBI ब्याज दरों में बदलाव करेगा या फिलहाल विराम देगा।
कब हो रही है RBI MPC बैठक?
RBI की MPC बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 के बीच आयोजित हो रही है। यह वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम पॉलिसी समीक्षा बैठक भी है। इससे पहले MPC की बैठक दिसंबर 3-5 के बीच हुई थी।
कब होगा पॉलिसी फैसले का ऐलान?
RBI गवर्नर 6 फरवरी को सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति फैसलों का ऐलान करेंगे। इसके बाद दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित होगी।
कहां देखें LIVE पॉलिसी घोषणा?
पॉलिसी का सीधा प्रसारण इन प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है:
• RBI की आधिकारिक वेबसाइट
• RBI का यूट्यूब चैनल
• RBI का आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट
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फरवरी बैठक से क्या उम्मीद?
बजट और भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते के तुरंत बाद हो रही इस बैठक में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। पिछले एक साल में RBI कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है, जिससे कर्ज सस्ता हुआ है। ऐसे में कई एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अब RBI कुछ समय के लिए रुक सकता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ग्रोथ सपोर्ट के लिए एक और छोटी कटौती की गुंजाइश अभी बाकी है।
दिसंबर MPC बैठक में क्या हुआ था?
दिसंबर पॉलिसी समीक्षा में MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए इसे 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया था। इससे पहले फरवरी से जून के बीच लगातार तीन कट में कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी। नीतिगत रुख ‘न्यूट्रल’ रखा गया था।
- SDF दर 5.00%
- MSF दर और बैंक रेट 5.50% पर तय किए गए।
आम लोगों पर इसका असर क्यों अहम?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है और इसी के आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो होम, ऑटो और पर्सनल लोन महंगे हो जाते हैं, जबकि दरों में कटौती होने पर EMI कम होती है और कर्ज सस्ता हो जाता है। इसलिए MPC का हर फैसला सीधे आम लोगों की जेब, EMI के बोझ और खर्च करने की क्षमता पर असर डालता है।
- रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है।
- रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं।
- रेपो रेट घटने पर EMI और कर्ज सस्ते होते हैं।
- इसलिए MPC का फैसला सीधे होम लोन, ऑटो लोन और बिजनेस कर्ज पर असर डालता है।
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