RBI ने महंगाई को काबू करने के लिए रेपो रेट 0.25% बढ़ा दिया है। इस बढ़ोतरी के साथ रेपो रेट बढ़कर 5.50% पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि अगली दो मौद्रिक पॉलिसी (फरवरी 2027 तक) में आरबीआई रेपो रेट में 0.50% की और बढ़ोतरी कर सकता है। आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी से आज बाजार में बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स 400 अंक से अधिक टूटकर बंद हुआ। अब बड़ा सवाल यह है कि आरबीआई के रेपो रेट बढ़ोतरी का आगे बाजार पर क्या असर होगा? अगर आप निवेशक हैं तो इस सवाल का जवाब जरूर ढूंढ रहेंगे। आइए इसका जवाब जानते हैं।
आगे बाजार की दिशा किससे तय होगी?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अब बाजार की नजर सिर्फ RBI के रेपो रेट बढ़ाने के फैसले पर नहीं, बल्कि उसके आगे के रुख, सिस्टम में लिक्विडिटी और ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर होगी। निवेशकों को RBI के रुख के साथ-साथ ग्रोथ और महंगाई के अनुमान, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर भी नजर रखनी होगी। इन सभी कारकों से यह तय होगा कि सख्त मौद्रिक माहौल में भारतीय शेयर बाजार आगे कैसा प्रदर्शन करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, MPC की बैठक का सबसे बड़ा संदेश सिर्फ 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि महंगाई को लेकर RBI के बदलते रुख का संकेत है। RBI अब कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को केवल कुछ समय के लिए रहने वाला असर मानकर चलने के बजाय महंगाई पर इसके लंबे असर को लेकर ज्यादा सतर्क दिख रहा है।
इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। कम ब्याज दरों से मिलने वाला फायदा अब सीमित हो सकता है। ऐसे में कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन को सही साबित करने के लिए उनकी कमाई में मजबूत बढ़ोतरी जरूरी होगी। आने वाले समय में बाजार उन कंपनियों को ज्यादा महत्व दे सकता है जिनकी कमाई वास्तविक रूप से बढ़ रही है और जिनके पास कीमतें बढ़ाने की क्षमता है।
किन सेक्टरों पर ज्यादा असर?
रेपो रेट बढ़ने से रियल एस्टेट, Auto और Consumer Durables जैसे ब्याज-दर संवेदनशील सेक्टरों पर दबाव आ सकता है, क्योंकि कर्ज महंगा होता है। वहीं कमजोर रुपये से IT exporters को फायदा मिल सकता है। बैंकिंग सेक्टर में बढ़ती फ्लोटिंग दरों से मार्जिन को कुछ फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को सिर्फ एक MPC बैठक के आधार पर बड़ा निवेश फैसला नहीं लेना चाहिए। बाजार की आगे की दिशा में कॉरपोरेट अर्निंग्स, मुनाफे की ग्रोथ, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और विदेशी निवेश ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगे
