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RBI On Bank License: कारपोरेट घरानों को बैंक लाइसेंस नहीं, फिलहाल कोई प्लान नहीं-आरबीआई गवर्नर

RBI On Bank License: आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि कारोबारी घरानों को बैंक खोलने की मंजूरी दी जाती है तो हितों के टकराव की आशंका बनी होती है। उन्होने कहा कि इस समय किसी योजना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस समय, उस दिशा में कोई विचार नहीं है।

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कॉरपोरेट घरानों को लाइसेंस नहीं

RBI On Bank License:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल कारोबारी घरानों को बैंक खोलने की मंजूरी देने की कोई योजना नहीं है। दास ने कहा कि कारोबारी घरानों को बैंक खोलने की अनुमति देने से हितों के टकराव और संबंधित पक्षों के लेनदेन से जुड़ा जोखिम बढ़ जाता है। आरबीआई ने लगभग एक दशक पहले बैंकों के लाइसेंस देने की प्रक्रिया के अंतिम दौर में कई बड़े कारोबारी समूहों को नए बैंकों का लाइसेंस देने के अयोग्य घोषित कर दिया था।

क्यों नहीं देना चाहता लाइसेंस

आरबीआई गवर्नर ने बैंक को अन्य व्यवसायों से इतर बताते हुए कहा कि दुनिया भर के अनुभव से पता चला है कि यदि कारोबारी घरानों को बैंक खोलने की मंजूरी दी जाती है, तो हितों के टकराव और संबंधित पक्ष के लेन-देन से संबंधित मुद्दे आने की आशंका बनी होती है। दास ने 1960 के दशक के अंत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत में भी कारोबारी घराने बैंकिंग गतिविधियों में शामिल थे।दास ने कहा कि दुनिया भर के अनुभव से पता चला है कि संबंधित पक्ष के लेन-देन की निगरानी करना या उन्हें विनियमित करना और रोकना बहुत मुश्किल होगा। इसमें शामिल जोखिम बहुत अधिक होते हैं

10 साल पहले रिजेक्ट किए थे आवेदन

आरबीआई गवर्नर ने बैंकों के गठन की कारोबारी घरानों को मंजूरी देने संबंधी किसी योजना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस समय, उस दिशा में कोई विचार नहीं है।आरबीआई ने लगभग एक दशक पहले बैंकों के लाइसेंस देने की प्रक्रिया के अंतिम दौर में कई बड़े कारोबारी समूहों को नए बैंकों का लाइसेंस देने के अयोग्य घोषित कर दिया था।हालांकि देश की वृद्धि आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजी जुटाने की कारोबारी घरानों की क्षमता को देखते हुए आरबीआई के एक कार्य समूह ने वर्ष 2020 में इस मुद्दे पर नए सिरे से चर्चा शुरू की थी।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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