RBI MPC Meeting : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आज अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा। यह निर्णय तीन दिन चली एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) की बैठक के बाद सामने आ रहा है। यह बैठक बुधवार से शुरू हुई थी। आरबीआई की ओर से गुरुवार को जारी बयान के मुताबिक, गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। विशेषज्ञों ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हुई। खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो दर में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है।
विशेषज्ञों की उम्मीद रेपो दर में 0.25% की कटौती
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। इससे पहले फरवरी से अब तक रेपो दर में कुल 1 प्रतिशत की कमी की जा चुकी है, हालांकि पिछली दो बैठकों में इसे 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (बीवाईएसटी) की संस्थापक लक्ष्मी वेंकटरमण वेंकटेशन ने कहा कि मौजूदा रेपो दर एक साल पहले की 6.5 प्रतिशत दर से काफी नीचे है। अक्टूबर में मुद्रास्फीति एक दशक के अपने सबसे निचले स्तर 0.25 प्रतिशत पर रही और थोक मूल्यों में 1.21 प्रतिशत की गिरावट आई है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को दिए जाने वाले लगभग 70 प्रतिशत ऋण सीधे रेपो दर से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत माहौल में सुधार के बावजूद, ऋण का अंतर अब भी व्यापक है और कार्यान्वयन स्तर पर वित्त तक पहुंच अब भी कठिन है। इस स्थिति को देखते हुए, ब्याज दर में 0.25 से 0.50 प्रतिशत की और कटौती करके उन्हें 5.25 प्रतिशत पर लाना उचित एवं आवश्यक है।
मुद्रास्फीति में कमी और मजबूत आर्थिक वृद्धि
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब खुदरा मुद्रास्फीति लगातार गिर रही है, जीडीपी वृद्धि तेज है, रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के पार जा चुका है और वैश्विक स्तर पर तनाव बना हुआ है। अक्टूबर में मुद्रास्फीति 0.25%, यानी दशक के सबसे निचले स्तर पर रही। थोक कीमतों में भी 1.21% की गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग जगत की राय दर कटौती से मिलेगी राहत
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSME) को दिए जाने वाले लगभग 70% ऋण रेपो दर से जुड़े हैं। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो दर में 0.25–0.50% की और कटौती करने से व्यवसायों को राहत मिलेगी और दर को लगभग 5.25% तक लाया जा सकता है। रियल एस्टेट क्षेत्र के अनुसार, छोटी सी कटौती भी मकान बिक्री बढ़ा सकती है और नकदी प्रवाह में सुधार ला सकती है।
दरें स्थिर रह सकती हैं
कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि को देखते हुए आरबीआई दरों में बदलाव न भी करे। मुख्य मुद्रास्फीति सरकार के तय 2% के निचले स्तर से भी नीचे है। दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 8.2% रही, जो उम्मीद से बेहतर है। सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि मुद्रास्फीति को 4% के आसपास (±2%) रखा जाए।
जीडीपी अनुमान बढ़ सकता है
पहली छमाही के बेहतर आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए, आरबीआई अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को फिर बढ़ा सकता है। अक्टूबर में 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% किया गया था।
