आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि वैश्विक स्थिति नाजुक, विभिन्न देशों में आर्थिक परिदृश्य कमजोर बना हुआ है। इसलिए रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.75 प्रतिशत से 5.50 प्रतिशत किया जा रहा है।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए अपनी नीति का रुख ‘Accommodative’ से बदलकर ‘Neutral’ कर दिया है।
रेपो रेट घटने से बैंकों की उधारी लागत कम हो जाती है। इसका असर यह होता है कि बैंक होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसी रिटेल लोन (खुदरा लोन) पर ब्याज दरें घटाते हैं। इससे आपकी मासिक EMI कम हो जाएगी।
अब अगर आप नया लोन लेने की सोच रहे हैं, तो वह कम ब्याज दर पर मिलेगा। इससे होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन की कुल लागत घटेगी।
लोगों के पास EMI में बचत के कारण खर्च करने योग्य आय बढ़ेगी, जिससे वे अधिक खरीदारी या निवेश कर पाएंगे। इसका फायदा व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।
छोटे और मध्यम बिजनेस के लिए कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर ब्याज घटेगा, जिससे उनके लिए बिजनेस चलाना आसान होगा। इससे रोजगार और आर्थिक गतिविधि को बल मिलेगा।
कम ब्याज दर पर होम लोन और ऑटो लोन मिलने से घर और वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। इससे रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर को लाभ होगा।