भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए कई निवेश और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। आरबीआई ने यह कार्रवाई कंपनियों के अनुरोध, नियमों में बदलाव और कारोबार बंद होने जैसी वजहों से की है। इस फैसले के बाद वित्तीय जगत में हलचल बढ़ गई है।
दो बड़ी निवेश कंपनियों का पंजीकरण रद्द
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने प्रमुख निवेश कंपनियों आरआर होल्डिंग्स और अंजलि कैपफिन का पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि इन कंपनियों ने खुद पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध किया था। आरबीआई के अनुसार अब ये कंपनियां ऐसे नियमों और मानकों को पूरा करती हैं, जिनके तहत उन्हें सीआईसी यानी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में काम करने के लिए अलग से पंजीकरण की जरूरत नहीं है। सीआईसी वे कंपनियां होती हैं जो मुख्य रूप से दूसरी कंपनियों में निवेश करती हैं। आरबीआई इनके कामकाज की निगरानी करता है ताकि वित्तीय व्यवस्था सुरक्षित बनी रहे।
एचडीएफसी होल्डिंग्स का लाइसेंस भी खत्म
आरबीआई ने एचडीएफसी होल्डिंग्स का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि कंपनी के विलय के बाद वह अब अलग कानूनी इकाई नहीं रही, इसलिए उसका लाइसेंस समाप्त कर दिया गया। यह उन सात एनबीएफसी कंपनियों में शामिल है जिन्होंने अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों के विलय के बाद कई बार पुराने लाइसेंस स्वतः समाप्त हो जाते हैं, क्योंकि नई संरचना में अलग पहचान नहीं बचती।
चार एनबीएफसी ने कारोबार बंद किया
आरबीआई ने जानकारी दी कि गुरु किरपा फिनवेस्ट, गजराज सिक्योरिटीज एंड सर्विसेज, अशोका विनियोग और पूर्वांचल इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसी कारण इन कंपनियों ने अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र सरेंडर कर दिया। इन कंपनियों के कारोबार बंद करने का फैसला बाजार की परिस्थितियों, बढ़ते नियमों और कारोबार में कम मुनाफे जैसी वजहों से जुड़ा माना जा रहा है।
150 एनबीएफसी के पंजीकरण भी रद्द
एक अलग अधिसूचना में आरबीआई ने एस्ट्यूट फाइनेंस, रेजिस इंडस्ट्रीज, एमआर फिनकैप और आईएनडी कॉर्प सिक्योरिटीज समेत 150 एनबीएफसी कंपनियों के पंजीकरण भी रद्द कर दिए। हालांकि आरबीआई ने इन सभी कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग कारण बताए हैं। माना जा रहा है कि कई कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रही थीं या फिर सक्रिय रूप से कारोबार नहीं कर रही थीं। आरबीआई समय-समय पर एनबीएफसी क्षेत्र की समीक्षा करता है ताकि निवेशकों के हित सुरक्षित रहें और वित्तीय व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
टाटा संस पर आरबीआई ने नहीं दी प्रतिक्रिया
इस बीच टाटा संस की ओर से पंजीकरण प्रमाणपत्र सरेंडर करने के अनुरोध को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। हालांकि आरबीआई ने इस मामले पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस पर स्थिति साफ हो सकती है।
वित्तीय क्षेत्र में बढ़ी सख्ती
आरबीआई लगातार वित्तीय कंपनियों पर निगरानी बढ़ा रहा है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही कंपनियां बाजार में काम करें जो सभी नियमों का पालन करती हों। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और वित्तीय प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।
