Amit Shah Siliguri Visit: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी को अगर नक्शे पर देखें तो यह इलाका भले ही छोटा नजर आता हो, लेकिन देश की सुरक्षा के लिहाज से इसकी अहमियत काफी बड़ी है। इसी इलाके में मौजूद सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आम तौर पर ‘चिकेन नेक’ (Chicken Neck) कहा जाता है। यह संकरा रास्ता देश के बाकी हिस्से को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी तरह की परेशानी का असर सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रह सकता।
इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा चर्चा में है। इस दौरे के तहत उनका पूरा फोकस देश की सीमा सुरक्षा, बॉर्डर मैनेजमेंट और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर है। दौरे के दौरान अमित शाह, सीमा सुरक्षा, सुरक्षा बलों की तैयारियों और सीमावर्ती इलाकों में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करेंगे।
अमित शाह 21 और 22 अगस्त को सिलिगुड़ी दौरे पर रहेंगे। ANI
आखिर कहां है ‘चिकेन नेक’?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित वह संकरा इलाका है, जिसके जरिए भारत का मुख्य हिस्सा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जुड़ता है। इसके सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई करीब 20 से 22 किलोमीटर मानी जाती है। पूर्वोत्तर जाने वाली कई अहम सड़कें और रेल मार्ग इसी क्षेत्र से गुजरते हैं। सैन्य दृष्टि से भी यह इलाका काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भारत की रणनीतिक लाइफलाइन कहा जाता है।
क्यों है यह इलाका बेहद संवेदनशील?
इस कॉरिडोर की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं इस इलाके के करीब हैं। वहीं उत्तर की तरफ चीन का तिब्बत क्षेत्र भी ज्यादा दूर नहीं है। यानी एक छोटे से इलाके के आसपास कई देशों की सीमाएं और संवेदनशील क्षेत्र मौजूद हैं। यही वजह है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था सामान्य सीमा क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा जटिल हो जाती है। सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर नजर रखनी पड़ती है।
चिकेन नेक से जुड़ बड़ी बातें। AI IMAGE
चीन की गतिविधियों पर क्यों रहती है नजर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास का इलाका भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। चुंबी घाटी के आसपास चीन की गतिविधियों और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर भारत की नजर रहती है। 2017 का डोकलाम गतिरोध भी इसी व्यापक रणनीतिक क्षेत्र से जुड़ा था। ऐसे में इस इलाके में किसी तरह का तनाव बढ़ने पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
बांग्लादेश-चीन की नजदीकी पर भी नजर
पिछले कुछ समय में बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ते संपर्कों ने भी इस इलाके को लेकर रणनीतिक चर्चा तेज की है। 2025 में बांग्लादेश के अंतरिम नेतृत्व के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने अपनी चीन यात्रा के दौरान चिकेन नेक को लेकर गीदड़भभकी दी थी। वहीं, बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास तीस्ता प्रोजेक्ट एरिया का दौरा किया था।
उत्तरी बांग्लादेश में लालमोनिरहाट एयरफील्ड के संभावित विकास और तीस्ता से जुड़ी परियोजनाओं में चीन की भूमिका को लेकर भी सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर रही है। हालांकि इन घटनाक्रमों को किसी तत्काल खतरे से जोड़ना सही नहीं होगा, लेकिन भारत के लिए यह पूरा क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फोटो। AP
प्राकृतिक आपदा भी है चुनौती
‘चिकेन नेक’ को लेकर चिंता सिर्फ सैन्य खतरे तक सीमित नहीं है। इसकी संकरी भौगोलिक स्थिति के कारण बाढ़, भूस्खलन या किसी बड़े हादसे की स्थिति में सड़क और रेल संपर्क प्रभावित हो सकता है। अगर किसी वजह से लंबे समय तक कनेक्टिविटी बाधित होती है तो पूर्वोत्तर के राज्यों तक सामान, लोगों और जरूरी सेवाओं की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार सुरक्षा के साथ-साथ वैकल्पिक संपर्क मार्गों पर भी काम कर रही है।
तीस्ता नदी की फोटो। istock
सुरक्षा के लिए भारत ने क्या तैयारी की?
भारत इस पूरे क्षेत्र में सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों स्तर पर तैयारियां करता रहा है। 2025 में उत्तर बंगाल में सेना ने ‘तीस्ता प्रहार’ नाम से एकीकृत फील्ड एक्सरसाइज की थी। इसके अलावा सेना, वायुसेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय और तेजी से तैनाती को लेकर भी समय-समय पर अभ्यास होते रहे हैं। इस रणनीतिक क्षेत्र की सुरक्षा में BSF, ITBP और SSB जैसे बलों की भी अहम भूमिका है। अलग-अलग सीमाओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है।
वैकल्पिक रास्तों की भी तलाश
भारत पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को केवल सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भर नहीं रखना चाहता। इसी सोच के तहत दूसरे संपर्क मार्गों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है। कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाता है। इनका मकसद व्यापार और संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य के लिए दूसरे विकल्प तैयार करना भी है।
अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे में क्या होगा?
गृह मंत्री अमित शाह के दौरे में सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी की गतिविधियां भी अहम रहेंगी। वह एसएसबी के फ्रंटियर मुख्यालय जाएंगे और सीमा सुरक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के साथ नई परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
सिलिगुड़ी में कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे अमित शाह। ANI
बता देंकि वह एसएसबी के जवानों और अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। एसएसबी, भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा में अहम जिम्मेदारी निभाती है। दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन, सुरक्षा बलों की तैयारियों और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर भी चर्चा होने की संभावना है।
बीएसएफ, एसएसबी और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल पर फोकस
22 अगस्त को होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसमें BSF, SSB, खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा ढांचे और चल रहे प्रोजेक्ट्स की प्रगति भी बैठक का हिस्सा हो सकती है। सरकार का जोर आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन पर है।
अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का एजेंडा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वह कावाखाली मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम और प्रदर्शनी में भी शामिल होंगे। इस प्रदर्शनी में नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से जुड़े बदलावों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए और इन्होंने आईपीसी, सीआरपीसी और पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली।
आखिर क्यों खास है यह दौरा?
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत करने पर काम कर रहा है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला सबसे अहम जमीनी संपर्क है। यही वजह है कि महज 22 किलोमीटर के इस संकरे गलियारे की सुरक्षा को सामान्य स्थानीय मुद्दे की तरह नहीं देखा जा सकता। यहां किसी भी बड़ी बाधा का असर पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी, सैन्य आवाजाही और जरूरी सेवाओं तक पड़ सकता है।
मोटे तौर पर देखें तो ‘चिकेन नेक’ नक्शे पर भले ही एक पतली-सी पट्टी दिखती हो, लेकिन भारत के लिए इसका महत्व बहुत बड़ा है। पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी से लेकर सीमा सुरक्षा तक, यह कॉरिडोर देश की सबसे अहम रणनीतिक लाइफलाइन में शामिल है।
