नए महीने की शुरुआत होने के साथ सुबह-सुबह ही आम आदमी को प्रीमियम पेट्रोल, फास्टैग, एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर और जेट फ्यूल की नई कीमतों ने बड़ा झटका दिया। वहीं, सरकार का कहना है कि कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतें डीरिगुलेटेड होती हैं। यानी ये बाजार के अनुसार तय होती हैं और आमतौर पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। केंद्र का कहना है कि इन सिलेंडर का इस्तेमाल उद्योगों और होटलों में किया जाता है और इनका LPG की कुल खपत में 10% से भी कम हिस्सा होता है।
क्यों बढ़े कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 अप्रैल को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का मुख्य कारण सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) में 44% की तेज वृद्धि थी। जो मार्च में 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर अप्रैल में 780 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई। केंद्र ने साफ किया कि ग्लोबल LPG सप्लाई का लगभग 20-30% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसा हुआ है, जिससे सप्लाई बाधित हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
क्या घरेलू एलपीजी सिलेंडर के बढ़ेंगे दाम
केंद्र ने साफ किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह से राहत देते हुए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपए पर स्थिर रखी गई है, यानी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं Pradhan Mantri Ujjwala Yojana (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की कीमत 613 रुपए ही बनी हुई है, जिससे उन्हें पहले की तरह सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा।
भारत में घरेलू LPG अभी भी सस्ता
भारत में घरेलू LPG की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में अभी भी सबसे कम बनी हुई हैं। पाकिस्तान में LPG की कीमत लगभग 1,046 रुपए है, श्रीलंका में करीब 1,242 और नेपाल में लगभग 1,208 रुपए है। इस तुलना से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर LPG उपलब्ध कराई जा रही है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां झेल रहीं नुकसान
वर्तमान कीमतों पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) प्रति सिलेंडर लगभग 380 रुपए की अंडर-रिकवरी झेल रही हैं। अनुमान है कि मई के अंत तक उनका कुल घाटा करीब 40,484 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। पिछले वर्ष भी कुल 60,000 करोड़ रुपए के नुकसान में से 30,000 करोड़ रुपए का भार ऑयल पीएसयू कंपनियों ने उठाया था, जबकि शेष 30,000 करोड़ रुपए सरकार ने वहन किया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम नागरिकों पर न पड़े।
पिछले एक महीने में वैश्विक पेट्रोलियम कीमतों में 100% तक की बढ़ोतरी के बावजूद, सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (PSU OMCs) 1 अप्रैल 2026 तक खुदरा स्तर (RSP) पर पेट्रोल पर 24.40 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 104.99 रुपए प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी झेल रही हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी नहीं
केंद्र ने यह साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 प्रति लीटर और डीजल 87.67 प्रति लीटर पर स्थिर हैं। वहीं, हाल ही में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स XP95, Power95 और Speed पर लागू की गई है। ये हाई-ऑक्टेन परफॉर्मेंस फ्यूल होते हैं, जिनकी कीमतें हर पंद्रह दिन में संशोधित की जाती हैं। इनकी बिक्री कुल पेट्रोल खपत का केवल 2% से 5% तक ही होती है। ये फ्यूल उपभोक्ता अपनी पसंद से अतिरिक्त कीमत (प्रीमियम) देकर खरीदते हैं। भारत में हर पेट्रोल पंप पर सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब भी स्थिर रखी गई हैं, जबकि दुनिया के कई देशों में इनकी कीमतें 30–50% तक बढ़ चुकी हैं।
क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल रेट?
एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान संकट के कारण क्रूड ऑयल की कीमत रिकॉर्ड हाई पर है। इससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, इसका बोझ अभी जनता पर नहीं डाला जा रहा है। लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं चल सकेगा। अगर हालात में सुधार नहीं होता है तो राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना है।
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