भारतीय ऑटोमोबाइल और कमोडिटी बाजार में इस समय पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel) की कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल कंपनियों द्वारा पिछले 5 दिनों के भीतर दो बार दाम बढ़ाए जाने के बाद देश के लगभग सभी बड़े शहरों में ईंधन के रेट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 80 पैसे से लेकर ₹1.15 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही कंपनियों ने तेल की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी की थी। करीब 4 साल के लंबे शांत दौर के बाद ईंधन के दामों में आई यह अचानक तेजी देश में चौतरफा महंगाई (Inflation) को न्यौता दे रही है।
मालभाड़ा (Transport Cost) बढ़ने से मचेगा हाहाकार
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे पहला और सबसे घातक असर देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ता है। भारत में 80 फीसदी से ज्यादा सामानों की सप्लाई ट्रकों और भारी वाहनों के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में की जाती है। डीजल महंगा होने के कारण ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और अन्य ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने मालभाड़े में तत्काल बढ़ोतरी के संकेत दे दिए हैं। जब ट्रकों का किराया या मालभाड़ा बढ़ेगा, तो फैक्ट्रियों से निकलने वाले सामान को दुकानदारों तक पहुंचाने की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में हर छोटी-बड़ी चीज की एमआरपी (MRP) पर इसका असर देखने को मिलेगा।
खाने-पीने की चीजें होंगी महंगे
ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी की सबसे सीधी मार देश की रसोई पर पड़ने वाली है। मंडियों में आने वाली हरी सब्जियां, फल, दालें और अनाज दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से ट्रकों के जरिए ही शहरों तक पहुंचते हैं। डीजल महंगा होने की वजह से ट्रांसपोर्टर्स अपना किराया बढ़ाएंगे, जिससे मंडियों में थोक भाव बढ़ जाएंगे। इसके अलावा, डेयरी कंपनियां जो हर सुबह शहरों में दूध और ब्रेड की सप्लाई करती हैं, उनकी भी गाड़ियों का लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि अगले कुछ ही दिनों में आलू, प्याज, टमाटर जैसी बुनियादी सब्जियों के साथ-साथ पैकेट बंद राशन और दूध के दाम भी बढ़ सकते हैं।
किसानों पर बढ़ेगा दोहरी लागत का बोझ
डीजल सिर्फ ट्रकों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान अपने खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए डीजल चालित पंप सेटों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे समय में जब खेती की लागत पहले से ही ऊंची है, डीजल की कीमतों में पांच दिनों में दो बार की बढ़ोतरी ने किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। खेती की लागत बढ़ने से आने वाले समय में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार में अनाज की कीमतों पर भी इसका असर दिखना तय है।
ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा की सेवाएं होंगी प्रभावित
महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले लोग जो 10 मिनट की ग्रॉसरी डिलीवरी, ऑनलाइन फूड डिलीवरी या कैब (Cab/Auto) सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें भी अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ जाता है, जिसकी भरपाई कंपनियां 'फ्यूल सरचार्ज' या 'डिलीवरी फीस' बढ़ाकर करती हैं। वहीं दूसरी तरफ, ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं और लोकल ऑटो के किरायों में भी बढ़ोतरी होना लगभग तय माना जा रहा है।
