आज के डिजिटल ज़माने में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) ने लोगों की लाइफस्टाइल और उनके खर्चों को मैनेज करना बेहद आसान बना दिया है। शॉपिंग से लेकर डाइनिंग तक, यह हमें हर जगह सहूलियत देता है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब इसका बिल हमारी जेब के बजट से बाहर हो जाता है। ऐसी स्थिति में क्रेडिट कार्ड के भारी-भरकम बिल से निपटने के लिए सबसे पहले हमें क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन के ब्याज दरों के बड़े अंतर को समझना होगा।
एक तरफ जहां क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज सबसे महंगा माना जाता है जिसमें समय पर भुगतान न करने पर बैंक आपसे सालाना 36% से 45% (यानी करीब 3% से 4% मासिक) तक का तगड़ा ब्याज वसूलते हैं। वहीं दूसरी तरफ, एक पर्सनल लोन आपको सालाना 10% से 18% जैसी काफी कम ब्याज दर पर आसानी से मिल जाता है। सीधे गणित के हिसाब से देखें तो 40% वाले इस जानलेवा कर्ज को 12% या 15% वाले सस्ते लोन में बदल देना एक बेहद स्मार्ट और समझदारी भरा कदम है, जिसे वित्तीय भाषा में 'डेट कंसोलिडेशन' कहा जाता है।
पर्सनल लोन लेकर बिल भरना कितना सही?
पर्सनल लोन लेकर क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपकी जेब पर से हर महीने लगने वाले भारी ब्याज का बोझ तुरंत कम हो जाता है। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड में यदि आप केवल 'मिनिमम ड्यू' यानी न्यूनतम देय राशि चुकाते रहते हैं, तो आपका मूलधन कभी कम नहीं होता और आप सालों-साल कर्ज के दलदल में फंसे रहते हैं। वहीं, पर्सनल लोन लेते समय एक निश्चित समय सीमा (जैसे 2 से 5 साल) और एक निश्चित ईएमआई (EMI) तय हो जाती है। इससे आपको पता होता है कि हर महीने एक तय रकम चुकाकर आप एक न एक दिन इस कर्ज से पूरी तरह मुक्त हो जाएंगे।
सिबिल स्कोर पर पड़ता है असर
इस रणनीति का दूसरा सबसे बड़ा फायदा आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) पर पड़ता है। जब आपके क्रेडिट कार्ड का यूटिलाइजेशन (Card Utilization Ratio) 30% से ऊपर चला जाता है या आप बिल चुकाने में देरी करते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से गिरने लगता है। पर्सनल लोन लेकर जैसे ही आप क्रेडिट कार्ड का पूरा आउटस्टैंडिंग बैलेंस 'नील' (Zero) कर देते हैं, वैसे ही आपका क्रेडिट स्कोर सुधरने लगता है। हालांकि, लोन लेने से आपके ऊपर एक नया अनसिक्योर्ड लोन जरूर दिखता है, लेकिन क्रेडिट कार्ड के ओवरड्यू (Overdue) के मुकाबले इसे वित्तीय संस्थाएं बेहतर मानती हैं।
पर्सनल लोन लेकर क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाना तभी तक समझदारी है, जब तक आप अपने क्रेडिट कार्ड को अलमारी में बंद कर दें या उसका इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित कर लें। अक्सर देखा गया है कि लोग लोन के पैसे से क्रेडिट कार्ड का बिल तो भर देते हैं, लेकिन अपनी पुरानी आदतों के कारण दोबारा उसी कार्ड से धड़ल्ले से शॉपिंग शुरू कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही महीनों में उनके सिर पर पर्सनल लोन की ईएमआई भी चल रही होती है और क्रेडिट कार्ड का एक नया भारी-भरकम बिल भी खड़ा हो जाता है। इसे ही असली 'डेट ट्रैप' कहा जाता है, जहाँ से निकलना बेहद मुश्किल होता है।
इसके साथ ही, नया पर्सनल लोन लेते समय आपको कुछ छुपे हुए खर्चों पर भी ध्यान देना चाहिए। लोन लेते वक्त बैंक आपसे 1% से 3% तक की प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। इसके अलावा, यदि भविष्य में आपके पास कहीं से पैसा आता है और आप लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो कई बैंक उस पर 'फोरक्लोजर चार्ज' (Foreclosure Charges) भी लगाते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले इन सभी अतिरिक्त खर्चों को क्रेडिट कार्ड के ब्याज से तुलना करके देख लें कि आपको वाकई बचत हो रही है या नहीं।
