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10 साल में 25 गुना बढ़ा भारत का रक्षा निर्यात, Operation Sindoor ने बदली डिफेंस सेक्टर की तस्वीर

ऑपरेशन सिंदूर न सिर्फ आतंक के खिलाफ भारत की संहारक प्रतिक्रिया का प्रतीक है। बल्कि, यह भारत के डिफेंस सेक्टर को हमेशा के नया मोड देने वाला मील का पत्थर भी है।

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रक्षा निर्यात में भारत की लंबी छलांग

Operation Sindoor : पिछले साल 7 मई को भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। अब इस ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर आई रिपोर्ट ने दिखाया है कि बीते एक दशक में भारत का रक्षा सेक्टर किस तेजी से बदला है। रिसर्च फर्म Rubix Data Sciences की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 10 साल में 25 गुना तक बढ़ गया है, जबकि रक्षा उत्पादन 3.2 गुना उछल चुका है।

₹1.54 लाख करोड़ पहुंचा रक्षा उत्पादन

रिपोर्ट ‘Rubix Industry Insights: Defence’ के अनुसार FY15 में भारत का रक्षा उत्पादन करीब ₹50,000 करोड़ था, जो FY25 में रिकॉर्ड ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया। सरकार ने अब FY29 तक इसे ₹3 लाख करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, रक्षा बजट में भी बड़ी छलांग देखने को मिली है। FY14 के मुकाबले डिफेंस बजट करीब तीन गुना बढ़कर FY27 में ₹7.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह केंद्र सरकार के किसी भी मंत्रालय के मुकाबले सबसे बड़ा आवंटन है और कुल यूनियन बजट का 14.67% हिस्सा रक्षा क्षेत्र को मिला है।

भारतीय कंपनियों को मिल रहे ऑर्डर

रिपोर्ट के मुताबिक इस तेजी की सबसे बड़ी वजह सरकारी खरीद में घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देना है। FY25 में रक्षा मंत्रालय ने ₹2.09 लाख करोड़ के 193 कॉन्ट्रैक्ट साइन किए, जिनमें 92% कॉन्ट्रैक्ट संख्या के हिसाब से और 81% वैल्यू के हिसाब से भारतीय कंपनियों को मिले।

करीब 65% रक्षा उपकरण अब देश में ही बन रहे हैं। एक दशक पहले स्थिति उलट थी, जब भारत 65-70% रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था।

डिफेंस एक्सपोर्ट ने बनाया नया रिकॉर्ड

भारत का रक्षा निर्यात FY26 में रिकॉर्ड ₹38.4 हजार करोड़ तक पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 63% ज्यादा है और FY17 की तुलना में 25 गुना उछाल दर्शाता है। सरकार ने FY29 तक इसे ₹50 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उत्पाद सप्लाई कर रहा है। इनमें BrahMos मिसाइल, Akash एयर डिफेंस सिस्टम, युद्धपोत, स्वाथी रडार और आर्टिलरी सिस्टम जैसे उपकरण शामिल हैं।

रूस पर निर्भरता घटी

हालांकि भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, लेकिन सप्लायर बेस तेजी से बदला है। 2011-2015 के दौरान भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 70% थी, जो 2021-2025 में घटकर 40% रह गई।

वहीं फ्रांस 29% हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है, जबकि इजरायल की हिस्सेदारी 15% तक पहुंच गई। FY26 में भारत ने $71 अरब के 55 रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, जो किसी एक वित्त वर्ष में सबसे बड़ा आंकड़ा है।

MSME और स्टार्टअप बने नई ताकत

Rubix Data Sciences के को-फाउंडर और CEO Mohan Ramaswamy ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा तैयारियों को नई पहचान दी है। अब खरीद प्रक्रिया तेजी से देश के भीतर केंद्रित हो रही है और निजी कंपनियां, MSME और स्टार्टअप भी बड़े पैमाने पर रक्षा इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन देश के भीतर मजबूत होने से आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को फायदा मिल रहा है। हालांकि जेट इंजन और एडवांस सेंसर जैसी अहम तकनीकों के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी तेजी से बढ़ी आत्मनिर्भरता

रिपोर्ट में कहा गया कि DAP 2020, ड्राफ्ट DAP 2026, Defence Industrial Corridors, ड्रोन के लिए PLI स्कीम, Positive Indigenisation List और iDEX जैसे सरकारी कार्यक्रम तेजी से स्वदेशीकरण को बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में भारत का रक्षा सेक्टर मजबूत लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए तैयार दिख रहा है और देश तेजी से आत्मनिर्भर डिफेंस इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है। खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा आत्मनिर्भरता पर भारी जोर दिया गया है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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