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ये है सबसे पुराना Gold ETF, पैसे लगाने वाले आज बन गए करोड़पति

सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं और ऐसे में गोल्ड में निवेश का सही मौका एक बार फिर सामने है। अगर आप बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो भारत का सबसे पुराना Gold ETF एक मजबूत विकल्प साबित हो सकता है, जिसने समय के साथ निवेशकों को करोड़पति बनाया है।

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Gold

बीते कुछ हफ्तों से सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। वैसे भी सोना हमेशा से लंबी अवधि में भरोसेमंद निवेश माना जाता रहा है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच गोल्ड ने एक बार फिर निवेशकों का भरोसा जीता है। आज गोल्ड में निवेश के कई तरीके हैं, जिनमें गोल्ड ETF एक आसान और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है। ऐसे में भारत का एक गोल्ड ETF जो सबसे पुराना है और इसमें जिनसे भी पैसा लगाया है आज वो करोड़पति बन गया है। आइए आपको सबसे पुराने गोल्ड ETF के बारे में बताते हैं।

भारत का सबसे पुराना गोल्ड ETF कौन-सा है?

भारत का सबसे पुराना गोल्ड ETF है Nippon India ETF Gold BeES। इसकी शुरुआत जुलाई 2007 में हुई थी। यह ETF सीधे तौर पर सोने की कीमतों को ट्रैक करता है और निवेशकों को फिजिकल गोल्ड खरीदे बिना गोल्ड में निवेश का मौका देता है। लंबे समय में इस ETF ने शानदार रिटर्न देकर सबको चौंका दिया है।

18 साल में 950% का जबरदस्त रिटर्न

Nippon India ETF Gold BeES ने अपने लॉन्च से अब तक करीब 950% का रिटर्न दिया है। इसका मतलब यह है कि जिसने 18 साल पहले इसमें निवेश किया था, उसकी रकम कई गुना बढ़ चुकी है। यह रिटर्न शेयर बाजार के कई बड़े मल्टीबैगर स्टॉक्स से भी बेहतर माना जा रहा है।

10 लाख रुपये कैसे बने 1 करोड़

अगर किसी निवेशक ने साल 2007 में इस गोल्ड ETF में 10 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू 1 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी होती। बिना ज्यादा शोर-शराबे के सोने ने उन निवेशकों को बड़ा फायदा दिया, जिन्होंने धैर्य के साथ लंबे समय तक निवेश बनाए रखा।

इस समय सोना घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में रिकॉर्ड स्तर पर है। भारत में गोल्ड फ्यूचर्स ने 1.22 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि चांदी 1.5 लाख रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुकी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार कारोबार कर रहा है।

Nippon India ETF Gold BeES ने बीते 18 सालों में करीब 13.5% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से रिटर्न दिया है। यह दर लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से काफी मजबूत मानी जाती है। आज इस ETF में निवेशकों का कुल निवेश करीब 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

इतिहास गवाह है कि जब-जब बाजारों में बड़ा संकट आया है, तब-तब सोने ने छलांग लगाई है। डॉट-कॉम क्रैश, 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस और 2020 का कोविड संकट—इन सभी दौर में निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स छोड़कर सोने को सुरक्षित ठिकाना बनाया।

गोल्ड ETF में बढ़ता निवेश

भारत में गोल्ड ETF में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में गोल्ड ETF ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश दर्ज किया है। कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 10 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है। इस साल अब तक गोल्ड ETF में करीब 2.18 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आ चुका है।

गोल्ड ETF ने यह साबित कर दिया है कि लंबी अवधि में सही एसेट क्लास में निवेश बड़ा फंड बना सकता है। बाजार में अनिश्चितता, महंगाई और वैश्विक तनाव के दौर में गोल्ड पोर्टफोलियो को संतुलन देने का काम करता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश पोर्टफोलियो में कुछ हिस्सा गोल्ड ETF को जरूर देना चाहिए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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