NSE IPO Plan: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने स्टॉक एक्सचेंज NSE और इसके मैनेजमेंट के पुराने लोगों, जिसमें सीईओ चित्रा रामकृष्ण और चेयरमैन रवि नारायण शामिल हैं, के खिलाफ कथित मिलीभगत और अनुचित ट्रेड प्रेक्टिस मामले को खुद ही खारिज कर दिया है। इससे देश के सबसे बड़े एक्सचेंज के लिए प्राइमरी शेयर सेल (IPO) की योजना को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है, जो 2016 से रुका हुआ था। यानी अब NSE अपना आईपीओ ला सकेगा।
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सबूतों का है अभाव
सेबी की मौजूदा चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के नेतृत्व में सेबी के नए मैनेजमेंट ने, जो खुद भी हितों के टकराव सहित कई आरोपों के घेरे में है, कहा है कि NSE के मामले में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसलिए मामले को बंद कर दिया गया है।
इस साल की शुरुआत में, सेबी ने को-लोकेशन मामले में एनएसई द्वारा किए गए सेटलमेंट आवेदन को खारिज कर दिया था।
IPO लाने का रास्ता साफ
सेबी के नए कदम से एनएसई की आईपीओ योजनाओं की राह में एक बड़ी बाधा को दूर हो गई है, जो को-लोकेशन विवाद के बाद पटरी से उतर गई थी। पिछले महीने, एनएसई ने अपने लंबे समय से अटके आईपीओ की प्रोसेस को फिर से शुरू किया और सेबी से NOC के लिए आवेदन किया।
क्या था पूरा मामला
को-लोकेशन घोटाला कुछ ब्रोकरों को एनएसई के सिस्टम, डेटा और ट्रेडिंग सुविधाओं तक एक्सेस देकर अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित है। यह मामला 2015 में शुरू हुआ था और इसमें कई जांच शामिल थीं। तीन व्हिसलब्लोअर ने सेबी से शिकायत की थी।
डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर एक आगामी संभावित IPO की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
