दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव दस्तक दे रहा है। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने वर्चुअल नेट मीटरिंग और पीयर-टू-पीयर (P2P) ऊर्जा व्यापार के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब आप सिर्फ बिजली के उपभोक्ता ही नहीं रहेंगे, बल्कि 'बिजली व्यापारी' भी बन सकेंगे। अगर आसान शब्दों में कहें तो, अगर आपकी छत पर लगे सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली बन रही है, तो आप उसे किसी और को बेचकर सीधे अपनी जेब भर सकते हैं। दिल्ली की तीनों बड़ी वितरण कंपनियों बीएसईएस (BSES), टाटा पावर डीडीएल (TPDDL) और एनडीएमसी (NDMC) को आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 1000-1000 ऐसे उपभोक्ताओं का नेटवर्क तैयार करें जो इस नई व्यवस्था का हिस्सा बनें।
क्या है वर्चुअल नेट मीटरिंग का जादू?
आमतौर पर 'नेट मीटरिंग' में आप अपनी छत पर लगे सोलर पैनल की अतिरिक्त बिजली ग्रिड (डिस्कॉम) को भेजते हैं और महीने के अंत में आपके कुल इस्तेमाल और भेजी गई बिजली का अंतर निकालकर बिल बनाया जाता है। लेकिन 'वर्चुअल नेट मीटरिंग' इसे एक कदम आगे ले जाती है। मान लीजिए एक बिल्डिंग में 20 परिवार रहते हैं और छत पर जगह कम है। अब ये 20 परिवार मिलकर किसी दूसरी जगह या खाली जमीन पर एक बड़ा सोलर प्लांट लगा सकते हैं। वहां से पैदा होने वाली बिजली को इन सभी 20 परिवारों के बीच उनके स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) के हिसाब से बांट दिया जाएगा। यानी सोलर प्लांट कहीं और होगा और उसका फायदा आपके घर के बिजली बिल में दिखेगा।
पड़ोसी को बिजली बेचें, मोबाइल ऐप से तय करें रेट
इस नई नीति का सबसे रोमांचक हिस्सा है 'पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रेडिंग'। अब उपभोक्ता आपस में सीधे बिजली खरीद और बेच सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास सोलर प्लांट है और आप शहर से बाहर जा रहे हैं या आपकी बिजली बच रही है, तो आप उसे अपने पड़ोसी को बेच सकते हैं। इसके लिए एक खास मोबाइल ऐप होगा, जिसके जरिए दोनों पक्ष बिजली की दरें खुद तय कर सकेंगे। लेनदेन की यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पूरी तरह सुरक्षित होगी। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं बिजली बेचने वाले के पास रूफटॉप सोलर और नेट मीटरिंग होना अनिवार्य है, वहीं बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता को अपने घर में 'स्मार्ट मीटर' लगवाना होगा।
आम जनता को इससे क्या फायदा होगा?
वर्चुअल नेट मीटरिंग और P2P ट्रेडिंग के कई बड़े फायदे हैं। सबसे पहले, सोलर बिजली बनाने वाले लोग अपनी अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई कर सकेंगे, जिससे सोलर पैनल लगाने का खर्च जल्दी वसूल हो जाएगा। दूसरा, बिजली खरीदने वाले को फायदा यह होगा कि उसे डिस्कॉम (बिजली कंपनियों) की तय दरों के मुकाबले सस्ती बिजली मिल सकती है। तीसरा, यह व्यवस्था उन लोगों के लिए वरदान है जिनके पास अपनी छत नहीं है या जो अपार्टमेंट में रहते हैं, क्योंकि वे अब सामूहिक रूप से सोलर पावर का हिस्सा बन सकते हैं। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखा है ताकि कोई धोखाधड़ी न हो सके।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
दिल्ली जैसे घने बसे शहर में हर किसी के पास सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। इसी बाधा को दूर करने के लिए वर्चुअल नेट मीटरिंग को 'सिंगल पॉइंट कंज्यूमर' तक पहुंचाया गया है। इससे न केवल रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बिजली ग्रिड पर भी दबाव कम होगा। सरकार का लक्ष्य है कि बिजली उत्पादन को विकेंद्रीकृत (Decentralize) किया जाए, ताकि आम आदमी भी ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
