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Voltas-Dixon नहीं, एक साल में 15% टूट चुके इस AC स्टॉक पर दांव लगा रहे FII-DII, क्या खास आ रहा नजर?

कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में सुस्ती और शेयरों में गिरावट के बीच एक ऐसा AC स्टॉक उभरकर सामने आया है, जिस पर विदेशी और घरेलू दोनों संस्थागत निवेशक एक साथ भरोसा जता रहे हैं। Voltas और Dixon जैसे बड़े नामों से अलग, यह कंपनी भारत के AC मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की रीढ़ मानी जाती है और अब EMS, रेलवे और डिफेंस जैसे हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स में भी तेजी से पैर पसार रही है। कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद FIIs और DIIs की बढ़ती हिस्सेदारी इस स्टॉक को लॉन्ग टर्म निवेशकों की रडार पर ले आई है।

AC Stock

इस स्टॉक में निवेश बढ़ा रहे संस्थागत निवेशक। (फोटो क्रेडिट, कैन्वा)

कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर पिछले एक साल से दबाव में है। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स करीब 10.52% टूट चुका है और 41,300 के स्तर से फिसलकर 36,871 के आसपास आ गया है। बीते एक महीने में ही इंडेक्स करीब 3% और कमजोर हुआ है। इस सेक्टर में GST कटौती और महंगाई में नरमी के बावजूद शेयरों पर दबाव बना रहा। लेकिन, इसी गिरावट के बीच एक ऐसा AC स्टॉक है, जिस पर विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) दोनों ने भरोसा जताया है। ये Voltas या Dixon नहीं, बल्कि Amber Enterprise India Limited है।

चौतरफा बिकवाली में अपवाद

मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों से करीब 11,130 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशक सीमित लेकिन चुनिंदा खरीद करते दिखे। लेकिन, इसी दौरान Amber Enterprise ऐसा नाम रहा, जिसमें FII और DII दोनों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है। FII ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 2.02% बढ़ाकर 30.6% कर दी, जबकि DII की हिस्सेदारी 2.38% बढ़कर 20.20% हो गई है।

भारत के AC बूम की रीढ़

Amber Enterprise भारत की सबसे बड़ी रूम एयर कंडीशनर (RAC) OEM कंपनियों में से एक है। कंपनी का RAC मैन्युफैक्चरिंग मार्केट में करीब 26% हिस्सा है। यह लगभग सभी बड़े AC ब्रांड्स के लिए मैन्युफैक्चरिंग करती है। यहां तक कि भारतीय रेलवे को भी सप्लाई देती है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में स्प्लिट AC, विंडो AC, इन्वर्टर AC, टावर AC, कैसेट और डक्टेबल AC के साथ ही AC कंपोनेंट्स जैसे कॉपर ट्यूब, शीट मेटल, मोटर, इंजेक्शन मोल्डिंग, हीट एक्सचेंजर जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025 में RAC से कंपनी की कुल आमदनी का करीब 43% आया। जबकि, वित्त वर्ष 2027 में यह हिस्सा लगभग 72% था, यानी कंपनी ने समय के साथ अपने रेवेन्यू सोर्स को डायवर्सिफाई किया है।

EMS की ओर शिफ्ट

Amber अब खुद को सिर्फ AC कंपनी नहीं, बल्कि एक पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्लेयर के तौर पर तैयार कर रही है। कंपनी के पास PCB और Bare PCB मैन्युफैक्चरिंग के लिए पहले से 6 प्लांट हैं। तमिलनाडु के होसुर में मल्टी-लेयर PCB यूनिट पर करीब 991 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है, जहां ट्रायल प्रोडक्शन Q2FY27 से शुरू होने की उम्मीद है। वहीं उत्तर प्रदेश के जेवर में कोरिया की कंपनियों के साथ JV के जरिए फ्लेक्स, HDI और सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट PCB के लिए करीब 3,200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

सोलर और EV में एंट्री

जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी से जुड़ी ILJIN Electronics ने Power-One Micro Systems में 60% हिस्सेदारी खरीदी। यह कंपनी सोलर इन्वर्टर, UPS सिस्टम, बैटरी एनर्जी स्टोरेज और EV चार्जर बनाती है। इस डील से Amber को हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स में एंट्री मिली है और बैकवर्ड इंटीग्रेशन की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

रेलवे और डिफेंस बना नया ग्रोथ इंजन

Amber Enterprise रेलवे और डिफेंस के लिए HVAC सॉल्यूशंस में मार्केट लीडर मानी जाती है। इसके अलावा कंपनी रेलवे डोर्स, गैंगवे, ब्रेक्स, कप्लर्स और पैंटोग्राफ जैसे प्रोडक्ट्स भी बनाती है। Sidwal यूनिट का ग्रीनफील्ड प्लांट Q4FY26 से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर सकता है, जबकि Yujin Machinery के साथ JV प्लांट H1FY27 से रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।

कमजोर तिमाही, फिर भी भरोसा क्यों

सितंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री 1,685 करोड़ रुपये से घटकर 1,647 करोड़ रुपये रही और 32 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में 21 करोड़ रुपये का मुनाफा था। इसके बावजूद संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी बढ़ाई। वजह है कंपनी का लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड। वित्त वर्ष 2026 में जहां बिक्री 1,652 करोड़ रुपये थी, वहीं TTM आधार पर यह करीब 10,983 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इसी दौरान नेट प्रॉफिट 24 करोड़ रुपये से बढ़कर 229 करोड़ रुपये हो गया है।

वैल्यूएशन में प्रीमियम

Amber Enterprise का शेयर फिलहाल करीब 105x PE पर ट्रेड कर रहा है, जो इंडस्ट्री मेडियन 50x से काफी ऊपर है। यानी ग्रोथ की उम्मीदें पहले से कीमत में शामिल हैं और यह स्टॉक हाई-रिस्क, हाई-कन्विक्शन कैटेगरी में आता है। कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर की सुस्ती के बावजूद Amber Enterprise में FII और DII की एकसाथ खरीद यह संकेत देती है कि मार्केट इसे सिर्फ AC कंपनी नहीं, बल्कि EMS, रेलवे और डिफेंस से जुड़ी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी के तौर पर देख रहा है। हालांकि, प्रीमियम वैल्यूएशन के चलते निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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