भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) में पिछले कुछ सालों में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद से देश के प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों (Residential Properties) की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के दो सबसे प्रमुख रियल एस्टेट हब नोएडा और गुरुग्राम इस तेजी में सबसे आगे रहे हैं। नोएडा में घरों की औसत कीमतों में 125 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है, जबकि गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की दरें 117 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। यह आंकड़ा यह साबित करता है कि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के तेजी से विकास और प्रीमियम हाउसिंग की बढ़ती मांग ने इन शहरों के प्रॉपर्टी मार्केट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।
क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं रेट?
कीमतों में इस तूफानी तेजी का मुख्य कारण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बेहतर कनेक्टिविटी और कोरोना महामारी के बाद बड़े व लग्जरी मकानों की बढ़ी मांग है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे वाले इलाकों में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के निर्माण और नए एक्सप्रेसवे नेटवर्क से प्रॉपर्टी की रीसेल वैल्यू और नए प्रोजेक्ट्स के रेट्स आसमान छू रहे हैं। इसी तरह, गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) और गोल्फ कोर्स रोड एक्सटेंशन जैसे प्रमुख इलाकों में मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) का असंतुलन देखा जा रहा है। खरीदार अब अच्छी एमेनिटीज वाले गेटेड कम्युनिटीज और ब्रांडेड बिल्डर्स के प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे डेवलपर्स ने भी कीमतों में लगातार इजाफा किया है।
11 बड़े शहरों में क्या है रेट?
केवल दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य 11 बड़े शहरों (Top Cities) में भी मकानों के दाम और रेंटल यील्ड (Rental Yield) में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है। मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों में भी संपत्ति की दरें 40 से 80 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे आईटी हब्स में आईटी प्रोफेशनल्स की ओर से आ रही लगातार मांग के कारण रेंटल इनकम (किराये से होने वाली कमाई) में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख शहरों में औसत रेंटल यील्ड अब 3.5% से बढ़कर 4.5% तक पहुंच गई है, जिसने निवेशकों को रियल एस्टेट में दोबारा बड़ी पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
हालांकि, कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी का दूसरा पहलू यह भी है कि नए खरीदारों (First-Time Homebuyers) और मध्यम वर्ग के लिए बजट में घर खरीदना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। होम लोन की मौजूदा ब्याज दरें और प्रॉपर्टी के ऊंचे बेस प्राइज मिलकर खरीदारों की ईएमआई (EMI) का बोझ बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि और प्रीमियम लाइफस्टाइल की चाहत के कारण भारतीय रियल एस्टेट बाजार में यह तेजी आगे भी जारी रहने की संभावना है। यदि आप निवेश या खुद रहने के लिए घर खरीदने का विचार बना रहे हैं, तो लोकेशन के भविष्य के प्लान्स और बिल्डर के ट्रैक रिकॉर्ड को जरूर जांच लें।
