भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि व्यक्तियों को विदेश से होने वाली खरीदारी या कमाई की जानकारी अलग से देने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय बैंक इस मामले में किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए जल्द ही अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) जारी करेगा।
RBI ने यह स्पष्टीकरण नई नियामकीय व्यवस्था को लेकर पैदा हुई गलतफहमी के बीच दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कंपनियों के मामले में भी 10 लाख रुपये प्रति बिल तक की सीमा के लिए स्व-घोषणा का प्रावधान है।मल्होत्रा ने बताया कि एकीकृत विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात एवं आयात) विनियमन, 2026 को 1 अक्टूबर से लागू किया गया है। नए नियमों के तहत रिपोर्टिंग से जुड़ी जरूरतों के मामले में सेवा क्षेत्र की कंपनियों को वस्तुओं का कारोबार करने वाली कंपनियों के समान व्यवस्था में लाया गया है।
RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि व्यक्तिगत प्रकृति के अनुबंधों के मामले में व्यक्तियों को रिपोर्टिंग की जरूरतों के दायरे में नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को लेकर कुछ गलतफहमी दिखाई दे रही है, जिसे जल्द FAQ के जरिए स्पष्ट किया जाएगा।
कारोबार आसान बनाने के लिए नए नियम
RBI ने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य विदेशी व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और कारोबार करना सुगम बनाना है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, व्यापार जगत को इन बदलावों की तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और संबंधित दिशानिर्देश इस साल जनवरी में ही जारी कर दिए गए थे।
मल्होत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि RBI के सामने रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी बैंकों या अधिकृत डीलरों जैसे मध्यस्थों की है। निर्यातकों या आयातकों को सीधे RBI को रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से कारोबारियों पर कोई बड़ा अतिरिक्त बोझ या असुविधा नहीं होनी चाहिए। आयातक और निर्यातक पहले से ही कुछ जरूरी जानकारी अपने बैंक या अन्य अधिकृत मध्यस्थों के साथ साझा करते रहे हैं।
