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New Labour Laws 2025: अब छुट्टियों के बदले मिलेगा ज्यादा पैसा! जानें अर्न्ड लीव के नए नियम

क्या आपकी छुट्टियां भी बेकार चली जाती हैं? नए नियमों के अनुसार, अब 'अर्न्ड लीव' (EL) के बदले कर्मचारियों को पहले से ज्यादा पैसा मिलेगा। बेसिक सैलरी बढ़ने और छुट्टियों को साल के अंत में 'कैश' कराने की सुविधा से आपकी बचत बढ़ेगी।

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Salary New Labor code

प्राइवेट और सरकारी सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए साल 2025-26 के नए लेबर लॉ (New Labour Laws) बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं। इन नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'अर्न्ड लीव' (Earned Leave - EL) यानी वैसी छुट्टियां जिन्हें आप काम करके कमाते हैं, उनके बदले मिलने वाले पैसे और उन्हें जमा करने (Carry Forward) की सीमा को लेकर किया गया है। अक्सर कर्मचारी अपनी साल भर की छुट्टियां नहीं ले पाते, जिससे वे 'लैप्स' हो जाती थीं, लेकिन अब नए नियमों के तहत इन छुट्टियों का मूल्य और भी बढ़ गया है।

क्या है अर्न्ड लीव (EL) और छुट्टियों का नया कोटा?

पुराने नियमों के अनुसार, अधिकांश कंपनियों में कर्मचारियों को साल भर में एक निश्चित संख्या में छुट्टियां मिलती थीं। नए लेबर लॉ के तहत, अब एक कर्मचारी को साल में कम से कम 30 अर्न्ड लीव (EL) मिलने का प्रावधान मजबूत किया गया है। यानी हर 20 दिन काम करने पर आपको 1 दिन की छुट्टी 'अर्न्ड लीव' के तौर पर मिलेगी। खास बात यह है कि अब कर्मचारी अपनी इन छुट्टियों को अगले साल के लिए 'कैरी फॉरवर्ड' (Carry Forward) कर सकेंगे। पहले की तुलना में अब अधिकतम जमा होने वाली छुट्टियों की सीमा को भी संशोधित किया गया है, ताकि कर्मचारी रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते समय एक मोटा फंड इकट्ठा कर सकें।

छुट्टियों के बदले पैसा अब हुआ आसान

नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा 'लीव एनकैशमेंट' में दिखने वाला है। पहले कई कंपनियों में नियम था कि आप केवल रिटायरमेंट के समय ही छुट्टियों का पैसा ले सकते हैं। लेकिन नए लेबर कोड के सुझावों के अनुसार, अब कर्मचारी साल के अंत में भी अपनी बची हुई छुट्टियों को 'कैश' करवा सकेंगे। इससे कर्मचारियों के पास त्योहारों या अन्य जरूरतों के समय अतिरिक्त नकदी (Cash) उपलब्ध होगी। साथ ही, अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है, तो नई कंपनी ज्वाइन करने से पहले पुरानी कंपनी को उसकी सभी बची हुई छुट्टियों का पूरा हिसाब और भुगतान करना होगा।

सैलरी कैलकुलेशन में होगा बदलाव

छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे का सीधा संबंध आपकी 'बेसिक सैलरी' से होता है। नए वेज कोड (New Wage Code) के तहत, आपकी बेसिक सैलरी आपके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। इसका मतलब यह है कि जब आपकी बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो आपकी प्रति दिन की छुट्टी की कीमत भी बढ़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि पहले आपकी बेसिक सैलरी कम थी, तो एक दिन की छुट्टी का पैसा भी कम मिलता था, लेकिन अब बेसिक सैलरी ज्यादा होने के कारण आपको लीव एनकैशमेंट के रूप में पहले से कहीं ज्यादा रकम मिलेगी।

लैप्स होने का डर हुआ कम

अक्सर कर्मचारी इस डर से छुट्टियां ले लेते थे कि साल के अंत में वे बेकार (Lapse) हो जाएंगी। नए लेबर लॉ में प्रावधान है कि एक कर्मचारी अधिकतम 300 छुट्टियों तक अपने खाते में जमा कर सकता है। यदि छुट्टियां इस सीमा से ऊपर जाती हैं, तो कंपनी को अतिरिक्त छुट्टियों का पैसा कर्मचारी को देना होगा या उन्हें अगले साल के कोटे में जोड़ने की अनुमति देनी होगी। इससे कर्मचारियों को अपनी छुट्टियों का सही प्रबंधन करने की आजादी मिलेगी और उनका आर्थिक नुकसान भी नहीं होगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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