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नया लेबर कानून: इस्तीफा या टर्मिनेशन, दोनों में अब FnF का पैसा सिर्फ 2 दिनों में मिल जाएगा, पढ़ें पूरी खबर

अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। अब आपको फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) सिर्फ दो दिन में होगा। यानी फुल एंड फाइनल सेटलमेंट का पैसा सिर्फ दो दिन में आपके अकाउंट में आ जाएगा।

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नया लेबर कानून

सरकार ने नौकरीपेशा वर्ग को बड़ी राहत देते हुए 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। नए लेबर कोड आने के बाद कई बड़े बदलाव दिखाई देंगे। इनमें पीएफ, गेच्युटी, टेक होम सैलरी और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) से जुड़ा है। नए लेबर कोड में एफएनएफ को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। नए लेबर कोड के मुताबिक, कंपनियों को अपने कर्मचारियों के फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) का पैसा दो वर्किंग डे में देना होगा। अभी तक बहुत सारी कंपनियां लगभग 30 दिनों के कानूनी समय-सीमा के अंदर पेमेंट करती थीं। जक कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो कंपनियों को ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट जैसे कई सेटलमेंट पर विचार करना होता है, जिनमें से हर एक की अपनी डेडलाइन होती है। इसलिए, कंपनियां अक्सर यह पक्का करने के लिए सब कुछ एक साथ सेटल कर देती हैं कि वे कानून का पालन कर रही हैं।

क्यों किया गया बदलाव?

जानकारों का कहना है कि इस बदलाव का मकसद सैलरी जल्दी और तेजी से मिलना और कर्मचारियों की फाइनेंशियल सिक्योरिटी पक्का करना है। टाइम लिमिट कम होने से ड्यूज़ को लंबे समय तक रोके रखने से तो बचा जा सकता है, लेकिन कंपनियों के लिए सिर्फ दो दिनों के अंदर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना ऑपरेशनल मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अभी तक कंपनियां फुल एंड फाइनल सेटलमेंट अमाउंट को कई शर्तों के साथ जारी करती हैं— जैसे कि कंपनी के एसेट्स की वापसी से जुड़ी शर्तें, एम्प्लॉयर की तरफ से होने वाली एग्जिट फॉर्मैलिटीज को पूरा करना, कर्मचारियों से रिलीज और एग्जिट डॉक्यूमेंट्स पर साइन करवाना, और इसी तरह की दूसरी बातें। नई व्यवस्था सभी एम्प्लॉई पर लागू होती है, जिसमें कमाई गई सैलरी या किए गए काम के नेचर के आधार पर कोई फर्क नहीं किया जाता है।

PF-ग्रेच्युटी बढ़ेगी, लेकिन हाथ में आएगी कम सैलरी

नए लेबर कोड के बाद, कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा है। जानकारों का कहना हे कि वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और इससे जुड़े नियमों में बदलाव से कर्मचारियों को उनके प्रोविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी और इन-हैंड सैलरी में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कर्मचारियों के PF, ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, टेक-होम सैलरी में कमी आ सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर एम्प्लॉयर ग्रॉस सैलरी बढ़ाए बिना पूरा बोझ कर्मचारी पर डालता है, तो टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी। लेकिन कंपनियां असर को कम करने के लिए अलाउंस को भी रीस्ट्रक्चर कर सकती हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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