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नीति आयोग रिपोर्ट: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जीरो करना है तो 22.7 लाख करोड़ डॉलर करना होगा निवेश

Net Zero Emissions: नीति आयोग के एक अध्ययन के जरिये कहा गया कि भारत को 2070 तक शुद्ध शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए कुल 22.7 लाख करोड़ डॉलर का निवेश करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें बिजली क्षेत्र के लिए सबसे अधिक निवेश की जरुरत है और वर्तमान निवेश लक्ष्य की तुलना में काफी कम है।

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2070 तक शुद्ध शून्य: भारत को ग्रीन इन्वेस्टमेंट के लिए चाहिए 22.7 लाख करोड़ डॉलर! (तस्वीर-istock)

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Net Zero Emissions : नीति आयोग ने सोमवार को एक अध्ययन जारी किया है, जिसमें भारत को 2070 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को “शुद्ध शून्य” पर ले जाने के लिए विशाल निवेश की जरुरत बताई गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है ‘विकसित भारत और शुद्ध शून्य की ओर परिदृश्य: एक अवलोकन’, के अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुल 22.7 लाख करोड़ डॉलर का निवेश करना पड़ेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस कुल निवेश का वार्षिक औसत लगभग 500 अरब डॉलर है। लेकिन मौजूदा हालात पर नजर डालें तो 2024 में भारत का वास्तविक वार्षिक निवेश केवल 135 अरब डॉलर रहा, जिसमें से केवल 70-80 अरब डॉलर ही स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में गया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि वर्तमान निवेश शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है।

पहले 2050 तक बड़े पैमाने पर निवेश की जरुरत

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नीति आयोग के अनुसार, कुल निवेश में से करीब आठ लाख करोड़ डॉलर पहले ही 2050 तक करना जरूरी होगा। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिजली क्षेत्र का है, जिसमें करीब पांच लाख करोड़ डॉलर का निवेश आवश्यक है। बिजली क्षेत्र में यह निवेश मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजनाओं, ऊर्जा दक्षता सुधारों और स्मार्ट ग्रिड जैसी तकनीकों में जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती वर्षों में यह निवेश करना महत्वपूर्ण है ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा संक्रमण और उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य हासिल किए जा सकें।

घरेलू और विदेशी वित्तीय साधनों का महत्व

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि घरेलू सुधारों और विदेशी निवेश के माध्यम से भारत 2070 तक अपने शुद्ध शून्य लक्ष्य के लिए करीब 16.2 लाख करोड़ डॉलर जुटा सकता है। घरेलू स्तर पर इसके लिए कुछ कदम जरूरी हैं। इनमें कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करना, घरेलू बचत को स्वच्छ ऊर्जा और अन्य टिकाऊ परियोजनाओं में निवेश के लिए वित्तीय रूप से सक्षम बनाना, और संस्थागत निवेशकों को नए क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

विदेशी स्तर पर भारत को एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे विदेशी पूंजी का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित होगा और लंबे समय तक स्थिर वित्तीय संसाधन उपलब्ध रहेंगे। नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नीति में पारदर्शिता और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाना बेहद जरूरी है।

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते अवसर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) में निवेश न केवल पर्यावरणीय लाभ देगा, बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी मदद करेगा। खासकर सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं, ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में निवेश से भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। नीति आयोग ने कहा कि निवेश का यह संक्रमण केवल उत्सर्जन को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक वृद्धि को भी बढ़ावा देगा।

नीति आयोग की सिफारिशें

रिपोर्ट में नीति आयोग ने सरकार और निवेशकों के लिए कई सिफारिशें दी हैं। इनमें प्रमुख हैं:-

  • बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में प्रारंभिक बड़े पैमाने पर निवेश।
  • कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट और घरेलू वित्तीय साधनों को मजबूत करना।
  • संस्थागत निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं को स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।
  • विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतियां और स्थिर आर्थिक माहौल सुनिश्चित करना।

नीति आयोग का यह अध्ययन स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े निवेश और मजबूत वित्तीय रणनीति की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन कदमों को समय पर लागू किया गया, तो भारत न केवल पर्यावरणीय लक्ष्यों में सफल होगा बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत स्थिति में आएगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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