बिजनेस

Nepal Copycats: 11 कंपनियों ने मशहूर ब्रांड्स की नाक में किया दम, 10 साल से चल रहा ‘तारीख पर तारीख’ का खेल

नेपाल में फेक ब्रांड्स ने कई कंपनियों के नाक में दम कर दिया है। कोका कोला से ह्यूगो बॉस जैसे ब्रांड्स पिछले करीब एक दशक से इन कंपनियों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

Image

10 साल से चल रहा केस

Nepal Copycats Case: नेपाल में नकली ब्रांड्स का खेल अब खुलकर सामने आ गया है। ग्लोबल कंपनियों की शिकायतों के बाद सरकार ने कार्रवाई तेज की, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ज्यादातर कंपनियां नोटिस के बाद भी सामने नहीं आईं। अब मामला कोर्ट में पहुंच चुका है और सख्त फैसले की उम्मीद है। काठमांडो पोस्ट ने इस मामले को रिपोर्ट करते हुए बताया है कि अब जल्द ही इस मामले में अदालत (Court) कोई फैसला सुना सकती है।

11 में से 9 कंपनियां गायब

नेपाल सरकार ने ट्रेंडमार्क उल्लंघन के आरोप में 11 कंपनियों को नोटिस जारी किया था, लेकिन तय डेडलाइन तक सिर्फ 2 कंपनियों ने जवाब दिया। बाकी 9 कंपनियों की चुप्पी अब उनके लिए भारी पड़ सकती है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, अगर कोई कंपनी कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखती है, तो फैसला आमतौर पर उसके खिलाफ ही जाता है, जिससे इन कंपनियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

कोका-कोला से ह्यूगो बॉस तक पीड़ित

इस पूरे मामले में कई इंटरनेशनल ब्रांड्स शामिल हैं, जिन्होंने लोकल कंपनियों पर ब्रांड और लोगो कॉपी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कोका-कोला ने “Palpal Cola”, “Cool Cola” जैसे प्रोडक्ट्स पर आपत्ति जताई है, जबकि ह्यूगो बॉस ने “Bass” नाम से मिलते-जुलते ब्रांड के खिलाफ केस किया है। इसके अलावा Zoom, Trek और अन्य कंपनियों ने भी नेपाल की कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

कानून 90 दिन का, लेकिन केस 10 साल तक लंबित

ट्रेंडमार्क कानून के तहत ऐसे मामलों का निपटारा 90 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन नेपाल में कई केस 10 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक दबाव और सीमित संसाधनों के कारण मामलों में देरी हो रही है। यही वजह है कि कंपनियां नियमों को गंभीरता से नहीं लेतीं और नोटिस को नजरअंदाज कर देती हैं।

तेजी से बढ़ रहे केस, सिस्टम पर बढ़ा दबाव

आंकड़े बताते हैं कि नकली ब्रांड्स से जुड़े मामलों में लगातार तेजी आ रही है। पिछले वित्त वर्ष में 356 केस दर्ज हुए थे, जबकि 483 का निपटारा हुआ। लेकिन चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में ही 382 नए केस आ चुके हैं और सिर्फ 178 का ही समाधान हो पाया है। इससे साफ है कि नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और सिस्टम उन पर काबू नहीं कर पा रहा।

सस्ता माल और कम जागरूकता बना रही बड़ा बाजार

विशेषज्ञ मानते हैं कि नकली प्रोडक्ट्स के बढ़ते कारोबार के पीछे उपभोक्ताओं की कम जागरूकता और सस्ते सामान की डिमांड बड़ी वजह है। कई बार ग्राहक असली और नकली प्रोडक्ट में फर्क नहीं कर पाते, जिससे कॉपीकैट कंपनियों को फायदा मिलता है और बाजार में इनका दबदबा बढ़ता जाता है।

नया कानून लाने की तैयारी, 15 गुना तक बढ़ेगा जुर्माना

नेपाल सरकार अब इस समस्या से निपटने के लिए नया इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत जुर्माना 15 लाख नेपाली रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, जो मौजूदा सीमा से 15 गुना ज्यादा है। हालांकि इसमें जेल का प्रावधान नहीं होगा। नेपाल में नकली ब्रांड्स का खेल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। कोर्ट में चल रही सुनवाई और आने वाला नया कानून तय करेगा कि इस फर्जी बाजार पर लगाम लगती है या नहीं। फिलहाल, कंपनियों की चुप्पी ही उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बनती दिख रही है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article