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महीने के आखिरी में पड़ गई पैसों की जरूरत, अपने खाली पड़े बैंक अकाउंट से भी निकाल सकते हैं पैसा

महीने का आखिरी हफ्ता हो और बैंक अकाउंट खाली हो जाए, तो टेंशन होना लाजिमी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीरो बैलेंस होने पर भी आप अपने अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं? बैंक की 'ओवरड्राफ्ट' (Overdraft) सुविधा के जरिए आप मुश्किल समय में अपनी लिमिट के अनुसार तुरंत कैश पा सकते हैं।

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कई बार जरूरी खर्चों या अचानक आई किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण बैंक अकाउंट का बैलेंस जीरो हो जाता है और अगली सैलरी आने में अभी वक्त होता है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग दोस्तों से उधार मांगते हैं या क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पास एक ऐसा विकल्प भी है जिसमें आप अपने खाली पड़े बैंक अकाउंट से भी पैसा निकाल सकते हैं? जी हां, बैंकों द्वारा दी जाने वाली इस विशेष सुविधा को 'ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी' (Overdraft Facility) कहा जाता है। यह सुविधा मुसीबत के समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, खासकर तब जब आपको तुरंत कैश की जरूरत हो।

क्या है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी

बैंक ओवरड्राफ्ट असल में एक तरह का Short-term Loan होता है। इसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को उनके खाते में मौजूद बैलेंस से अधिक पैसा निकालने की अनुमति देता है। आमतौर पर यह सुविधा सैलरी अकाउंट (Salary Account) रखने वाले ग्राहकों को आसानी से मिल जाती है। बैंक आपकी सैलरी, क्रेडिट हिस्ट्री और बैंक के साथ आपके पुराने व्यवहार के आधार पर एक 'ओवरड्राफ्ट लिमिट' तय करता है। मान लीजिए आपके अकाउंट में जीरो बैलेंस है और बैंक ने आपको ₹50,000 की लिमिट दी है, तो आप जरूरत पड़ने पर इस सीमा तक पैसा निकाल सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको केवल उसी राशि पर ब्याज देना होता है जिसे आपने निकाला है, न कि पूरी लिमिट पर।

कितना मिलेगा पैसा?

प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खातों में भी सरकार ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान करती है। हालांकि, सैलरी अकाउंट के मामले में यह लिमिट आपकी मासिक आय का दो से तीन गुना तक हो सकती है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम और शर्तें भी होती हैं। आमतौर पर बैंक इसके लिए सालाना 12% से 15% तक का ब्याज वसूलते हैं, जो कि क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होता है। साथ ही, यह एक 'रिवॉल्विंग' सुविधा है, यानी जैसे ही आपके अकाउंट में अगली सैलरी आती है, बैंक अपने आप ओवरड्राफ्ट की राशि और ब्याज काट लेता है और आपकी लिमिट दोबारा रीसेट हो जाती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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