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GST Compensation Cess: GST क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्री समूह के संयोजक हों सकते हैं वित्त राज्यमंत्री

GST Compensation Cess: जीओएम क्षतिपूर्ति उपकर के भविष्य पर फैसला लेगा कि कैसे इसे केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित किया जाए। साथ ही मंत्री समूह यह भी देखेगा कि कानून में क्या बदलाव करने की जरूरत है, क्योंकि अब इसे क्षतिपूर्ति उपकर नहीं कहा जा सकता है। मंत्री समूह यह देखेगा कि क्या इसे क्षतिपूर्ति उपकर के अलावा किसी अन्य रूप में जारी रखा जा सकता है।

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जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर ।

Photo : iStock

GST Compensation Cess: वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर पर काम कर रहे मंत्री समूह (जीओएम) के संयोजक हो सकते हैं। इसमें राज्यों के सदस्य भी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने आगे कहा कि संदर्भ की शर्तें (टीओआर) और जीओएम के सदस्यों को अंतिम रूप देने का काम जारी है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘जीओएम को यह सुझाव देना होगा कि अहितकर और विलासिता की वस्तुओं पर एकत्रित उपकर को केंद्र और राज्यों के बीच कैसे बांटा जाएगा। साथ ही जीओएम इस बदलाव को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधनों पर सुझाव देगा।’’ अधिकारी ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह के सदस्यों पर निर्णय की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन, चूंकि मुद्दा उपकर के संबंध में है, जो केंद्र द्वारा एकत्र किया जाता है, और इसका बंटवारा होगा, ऐसे में जीओएम में केंद्र से भी एक सदस्य होगा।

अधिकारी ने कहा, ‘‘आमतौर पर जीओएम के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसका संयोजक बनाया जाता है। इसलिए, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री के जीएसटी मुआवजा उपकर पर जीओएम के संयोजक होने की संभावना है।’’ जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह अपनी बैठक में मंत्रियों का एक समूह गठित करने का निर्णय लिया था जो परिषद को सुझाव देगा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर पर कैसे आगे बढ़ा जाए। कोविड महामारी के वर्षों में राजस्व में कमी की भरपाई के लिए जो कर्ज लिया गया था उसके भुगतान के लिए विलासिता और अहितकर उत्पादों पर यह लगाया जाता है।

सरकार ने राज्यों के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में 2.69 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। जीएसटी परिषद ने ऋण और ब्याज चुकाने के लिए मुआवजा उपकर को मार्च, 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि ऋण और ब्याज का भुगतान दिसंबर, 2025 या जनवरी, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

क्षतिपूर्ति उपकर को शुरुआत में राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए पांच साल को लाया गया था। यह जून, 2022 में समाप्त हो गया था, लेकिन इससे जुटाई गई राशि का इस्तेमाल केंद्र द्वारा कोविड-19 के दौरान लिए गए कर्ज और ब्याज के 2.69 लाख करोड़ रुपये के भुगतान के लिए किया गया। जून, 2022 में केंद्र ने क्षतिपूर्ति उपकर को मार्च, 2026 तक बढ़ा दिया था। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) एक जुलाई, 2017 को लागू हुआ था।

भाषा इनपुट के साथ

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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