बिजनेस

मिनिमम बैलेंस के नाम पर किस बैंक ने आपकी जेब से निकाले सबसे ज्यादा पैसे? HDFC से लेकर SBI तक ने पेनल्टी के नाम पर की 19,083 करोड़ की वसूली

बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनल्टी अब ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, HDFC और SBI जैसे बड़े बैंकों ने ₹19,083 करोड़ की वसूली की है।

Image

Minimum Balance

भारतीय बैंकिंग सेक्टर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने आम बचतकर्ताओं को हैरान कर दिया है। मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) यानी खाते में एक निश्चित राशि न रख पाने वाले ग्राहकों से बैंकों ने पेनल्टी के नाम पर मोटी रकम वसूली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने पिछले कुछ वित्तीय वर्षों में कुल 19,083 करोड़ रुपये की वसूली की है। यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे कई राज्यों के बड़े विकास प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकते हैं। इस वसूली ने एक बार फिर बैंकों के सेवा शुल्कों (Service Charges) और आम आदमी पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर बहस छेड़ दी है। ऐसे में आइए जानते हैं किस बैंक ने आपकी जेब से कितने पैसे निकाले हैं?

किस बैंक ने की कितनी वसूली?

वसूली की इस दौड़ में प्राइवेट सेक्टर का दिग्गज HDFC बैंक सबसे आगे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले HDFC बैंक ने ही पेनल्टी के जरिए हजारों करोड़ रुपये जुटाए हैं। वहीं, सरकारी बैंकों में देश का सबसे बड़ा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी पीछे नहीं है। हालांकि SBI ने कुछ समय पहले बेसिक बचत खातों के लिए मिनिमम बैलेंस की शर्त हटा दी थी, लेकिन अन्य श्रेणियों के खातों और पुराने बकाये के मामले में बैंक की वसूली अभी भी चर्चा में है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने भी इस मद में भारी कमाई की है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोग इस पेनल्टी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि अक्सर उनके खातों में नकदी का प्रवाह कम होता है।

किसका कितना नुकसान?

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि मिनिमम बैलेंस की शर्त सबसे ज्यादा उन लोगों को चोट पहुंचाती है जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से अपने खाते पर निर्भर होते हैं। प्राइवेट बैंक अक्सर शहरी इलाकों में ₹10,000 से ₹25,000 तक का औसत मासिक बैलेंस (MAB) मांगते हैं। अगर ग्राहक इस राशि को बनाए रखने में एक दिन भी चूक जाता है, तो बैंक भारी पेनल्टी काट लेते हैं। कई बार तो पेनल्टी की राशि इतनी ज्यादा होती है कि ग्राहक का मुख्य बैलेंस भी कम होने लगता है। दूसरी ओर, संपन्न वर्ग के लिए यह शर्तें मायने नहीं रखतीं, जिससे यह व्यवस्था सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी विवादों में रहती है।

क्या कहते हैं आरबीआई के नियम?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे मिनिमम बैलेंस न होने पर लगने वाली पेनल्टी को तार्किक रखें और यह ग्राहक की कमी के अनुपात में ही होनी चाहिए। साथ ही, बैंकों को पेनल्टी काटने से पहले ग्राहकों को अलर्ट (SMS या ईमेल) भेजना अनिवार्य है। आरबीआई का यह भी नियम है कि पेनल्टी की वजह से किसी भी खाते का बैलेंस 'नेगेटिव' (Negative) नहीं होना चाहिए। यानी अगर खाते में ₹0 बचे हैं, तो बैंक पेनल्टी के नाम पर उसे माइनस में नहीं ले जा सकते। इसके बावजूद, बैंक सर्विस चार्ज के अलग-अलग नाम देकर ग्राहकों की जेब ढीली करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

अगर आप भी इस भारी-भरकम पेनल्टी से बचना चाहते हैं, तो 'बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट' (BSBD) या 'जन धन खाता' एक बेहतरीन विकल्प है। इन खातों में मिनिमम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं होती और बैंक कोई पेनल्टी नहीं काट सकते। हालांकि, इनमें कुछ सीमाएं होती हैं, जैसे महीने में सिर्फ चार बार ही पैसा निकालना (ATM सहित)। इसके अलावा, अपने बैंक के नियमों को ध्यान से पढ़ें और कोशिश करें कि खाते में हमेशा तय सीमा से थोड़ी ज्यादा रकम रहे ताकि किसी अचानक आए खर्च की वजह से बैलेंस कम न हो।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article