MCX Silver: चांदी में जबरदस्त तेजी का दौर (Bull Phase) थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज बाजार खुलते ही चांदी की कीमत में 8500 रुपये की बड़ी तेजी आ गई है। एमसीएक्स पर सिल्वर का भाव आज 8,541 रुपये उछलकर 232741 रुपये पर पहुंच गया है। आपको बता दें कि पिछले 1 महीने में चांदी की कीमत में 42% की बड़ी बढ़ोतरी, 3 महीने में 63% का उछाल, 6 महीने में 106% की वृद्धि, और 1 साल में चांदी का भाव 150% बढ़ा है। कमोडिटी एक्सपर्ट का कहना है कि चांदी में यह तेजी अभी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
इसलिए बढ़ रही चांदी की कीमत
1. मांग (Demand) में तेजी
चांदी सिर्फ एक इन्भेस्टमेंट मेटल नहीं है, बल्कि औद्योगिक उपयोग में भी बड़ी भूमिका निभाती है। खासतौर से सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उपकरणों में। इससे मांग लगातार बढ़ रही है।
2. सप्लाई (Supply) का दबाव
विश्व स्तर पर चांदी का उत्पादन उसकी बढ़ती मांग के मुकाबले धीमा है। सप्लाई कम होने से रेट ऊपर जाते हैं।
3. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
निवेशक अब जोखिम भरे बाजारों और शेयरों की बजाय कीमती धातुओं (Precious Metals) में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं ताकि वे आर्थिक और मुद्रा अनिश्चितता से बच सकें। यह चांदी की कीमतों को सपोर्ट देता है।
4. US फेडरल रिज़र्व की नीतियां
अगर अमेरिका जैसे बड़े देश ब्याज़ दरें घटाने की संभावना जताते हैं, तो डॉलर कमजोर होता है और धातुओं की कीमतें ऊपर जाती हैं — इसमें चांदी भी शामिल है।
5. निवेश में बढ़ती रूचि
इंटरनेशनल मार्केट और ETF (Exchange Traded Funds) जैसे चीज़ों में चांदी में निवेश बढ़ा है, जिससे घरेलू MCX पर भी भाव ऊपर की तरफ दबाव बनता है।
वेनेजुएला संकट ने भाव में आग लगाया
कमोडिटी एक्सपर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में चांदी ने पहली बार $75 प्रति औंस का आंकड़ा पार किया है। यह नई रैली का संकेत है। चांदी की कीमत में तेज उछाल के पीछे वेनेजुएला में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका द्वारा तेल टैंकरों पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। इसके चलते चांदी की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बढ़ी है। साथ ही, बाजार के जानकारों का मानना है कि US फेडरल रिजर्व 2026 तक ब्याज दरों में ढील देना जारी रखेगा, भले ही फेड का डॉट प्लॉट अभी सिर्फ एक रेट कट की गुंजाइश दिखा रहा हो – ऐसा माहौल आमतौर पर कीमती धातुओं जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स के लिए फायदेमंद होता है।
तीसरी तिमाही की मजबूत GDP रीडिंग के बावजूद यह उम्मीद बनी हुई है, जो बताता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। निवेशकों को यह भी उम्मीद है कि अगले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की तुलना में ज्यादा नरम रुख अपना सकते हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कम ब्याज दरों की पसंद के साथ ज्यादा तालमेल बिठा सकते हैं। इतना ही नहीं, इंड्रस्ट्रियल डिमांग तेजी से बढ़ी है और सप्लाई कम हुई है। इसका भी असर कीमत पर देखने को मिल रहा है।
