बिजनेस

खुलते ही बाजार धड़ाम! Sensex 700 और Nifty 200 अंक फिसला, दबाव में ऑटो, IT और बैंकिंग

शेयर बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव जारी है। सप्ताह के आखिरी दिन बाजार की कमजोर ओपनिंग हुई। सेंसेक्स जहां 700 अंक से ज्यादा फिसल गया। वहीं, Nifty 23700 के नीचे आ गया है।

Image

बाजार में गिरावट का रुख जारी

Share Market Today : अमेरिकी बाजार में आई तेज गिरावट, एशियाई शेयर बाजारों की कमजोरी और ऊंचे कच्चे तेल के दाम का असर घरेलू बाजार पर दिख रहा है। लगातार पांचवे सत्र में भारतीय बाजार में ओपनिंग सेशन में गिरावट आई है। शुक्रवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 200 अंक तक फिसलकर 23,700 के नीचे पहुंच गया। अमेरिकी शेयर बाजार में रातभर आई भारी गिरावट, एशियाई बाजारों की कमजोरी और 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने कच्चे तेल के दाम ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया।

सेंसेक्स-निफ्टी का क्या रहा हाल?

Sensex 778 अंक की गिराव्ट के साथ 75,613.43 अंक तक फिसल गया है। वहीं, Nifty 223 अंक लुढ़ककर 23,646.90 अंंक तक गिर गया हे। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा बिकवाली ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। निफ्टी ऑटो करीब 1% और बैंक इंडेक्स लगभग 0.70% टूट गया। ऑयल एंड गैस, रियल्टी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली

केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.71% नीचे आ गया है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 लगभग 0.70% टूटा है। इसके अलावा निफ्टी 500 में भी करीब 0.72% की गिरावट देखने को मिली है। इससे साफ है कि बिकवाली पूरे बाजार में फैली हुई थी।

ग्लोबल हालात से बढ़ी चिंता

भारतीय बाजार पर वैश्विक बाजारों की कमजोरी का सीधा असर देखने को मिला। अमेरिकी टेक कंपनियों के कमजोर नतीजों और AI पर बढ़ते खर्च ने निवेशकों को चौकन्ना कर दिया है। इसकी वजह से नैस्डैक 2% से ज्यादा टूटा। वहीं, जापान का निक्केई 225 करीब 3% फिसल गया। जबकि, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5% से ज्यादा नीचे आ गया है। इसके अलावा महंगे कच्चे तेल की वजह से हैंगसेंग और शंघाई बाजार भी दबाव में रहे।

महंगा कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। ऊंचे तेल के दाम भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाते हैं क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले दांव घटाने शुरू कर दिए।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

    और पढ़ें
    End of Article