बिजनेस

LPG Crisis: चाय की चुस्की पर भारी ईरान संकट! गैस सिलेंडर की कमी से टपरी बंद होने का खतरा

LPG Crisis: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने चाय दुकानदारों को बड़े संकट में डाल दिया है। गैस की किल्लत से चाय की दुकानों और सड़क किनारे चलने वाले छोटे फूड स्टॉल पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। सिलेंडर नहीं मिलने से कई दुकानें बंद होनी शुरू हो गई है।

Image

चाय दुकानदारों की परेशानी

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल, गैस प्रोडक्शन और सप्लाई पर साफ दिखने लगा है। युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस के उत्पादन व आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के जरिये होने वाली सप्लाई प्रभावित होने से भारत पर बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। गैस की आपूर्ति में भारी गिरावट के चलते देशभर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत बढ़ती जा रही है। स्थिति को संभालने और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम (ECA) लागू किया है, लेकिन इसके बावजूद हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ पाए हैं। कई जगहों से होटल और रेस्तरां गैस की कमी के कारण बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर सड़क किनारे चलने वाले छोटे कारोबारों पर पड़ने की आशंका है। खासकर चाय की दुकानों या ‘चाय की टपरी’ पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यदि गैस की किल्लत लंबे समय तक जारी रहती है, तो देशभर में लाखों चाय की टपरियां बंद होने की नौबत आ गई है। नोएडा के फिल्म सिटी इलाके में, चाय के जो ठेले कुछ ही दिन पहले तक लोगों की भीड़ से गुलजार रहते थे, अब वहां सन्नाटा पसरा है। उनके बर्नर ठंडे पड़े हैं और चाय दुकानदार अपनी रोजी-रोटी को लेकर बेहद चिंतित हैं।

गैस सिलेंडर के लिए संघर्ष लेकिन फिर भी...

सुमित (बदला हुआ नाम), जो कई वर्षों से दफ्तरों के बाहर चाय बेचकर गुजारा कर रहे थे, गैस की किल्लत के चलते अचानक दुकान बंद करना पड़ा है। वह कहते हैं, “गैस खत्म हो गई… तुरंत दुकान बंद करनी पड़ी।” सुमित बताते हैं कि वह एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए काफी कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि ₹200 प्रति किलो (यानी 14.2 किलो के सिलेंडर के लिए करीब ₹2,840) देने को भी तैयार हैं, जो छोटे दुकानदारों के लिए बेहद महंगा है। इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।

एक और चाय बेचने वाले का कहना है कि उसके डीलर ने “अपना फोन बंद कर दिया है। इसलिए उसके पास गैस लेने का कोई रास्ता नहीं बचा। वह बताते हैं, “हम हर कप पर लगभग 40 प्रतिशत मार्जिन कमाते हैं, लेकिन गैस के बिना, बिजनेस तुरंत बंद हो गया है।

कीमत बढ़ने और किल्लत की दोहरी मार

एलपीजी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई संकट ने चाय दुकानदारों को गंभीर मुश्किल में डाल दिया है। दिल्ली के मयूर विहार में एक चाय दुकानदार ने बताया कि पहले जहां चाय दुकानदार रोजाना एलपी गैस पर लगभग 200 रुपये खर्च करते थे, अब वही खर्च बढ़कर करीब 400 रुपये हो गया है। इतना ही नहीं, इसके बावजूद गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है। चाय दुकानदारों का कहना है कि गैस की किल्लत और बढ़े दाम के बावजूद वे तुरंत चाय की कीमत बढ़ा नहीं सकते, क्योंकि इससे ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है।

सरकार ने रोक नहीं लगाई

हालांकि, सरकार ने घरेलू LPG की सप्लाई पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन इन स्ट्रीट ऑपरेटर्स को शायद ही कभी कानूनी तौर पर सिलेंडर मिलते हैं और उन्हें लोकल डीलर्स पर निर्भर रहना पड़ता है जो उन्हें बहुत ज्यादा बढ़ी हुई ऑफ-बुक कीमतों पर बेचते हैं, यह एक लाइफलाइन है जो चल रही सप्लाई की कमी के बीच तेज़ी से पहुंच से दूर होती जा रही है।

क्यों बढ़ा एलपीजी का संकट?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण LPG शिपमेंट में देरी से सप्लाई का संकट और बढ़ गया है, जिससे सरकार को घरेलू खपत को प्राथमिकता देने पर मजबूर होना पड़ा है। नतीजतन, बड़े शहरों में कमर्शियल सप्लाई बंद हो गई है। मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई, कोलकाता और तेलंगाना सहित कई होटल एसोसिएशन ने पहले ही रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन को कमर्शियल LPG सप्लाई रोकने की घोषणा कर दी है, और आम लोगों के लिए "रोजाना के खाने में रुकावट" की चेतावनी दी है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

और पढ़ें
End of Article