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दोस्तों या रिश्तेदारों को क्रेडिट कार्ड देना पड़ सकता है भारी, Income Tax विभाग भेज सकता है नोटिस

अपनों की मदद के लिए क्रेडिट कार्ड देना आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है। भारी खर्च और आय के बीच अंतर होने पर इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है। रिवॉर्ड पॉइंट्स के चक्कर में अपनी वित्तीय सुरक्षा दांव पर न लगाएं।

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भारत में अक्सर लोग अपनों की मदद करने से पीछे नहीं हटते। चाहे सेल के दौरान किसी को महंगा फोन दिलाना हो या किसी इमरजेंसी में अस्पताल का बिल भरना हो, हम अपना क्रेडिट कार्ड तुरंत निकाल देते हैं। कई बार लोग रिवॉर्ड पॉइंट्स या डिस्काउंट के लालच में भी दूसरों की खरीदारी अपने कार्ड से कर लेते हैं। सुनने में यह सामान्य लगता है, लेकिन ये क्रेडिट कार्ड होल्डर के लिए मुसीबत बन सकता है। ऐसे में अगर आप भी अपने दोस्त या रिश्तेदार का क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते है या उन्हें अपना कार्ड देते हैं तो इससे आप इनकम टैक्स की रडार पर आ सकते हैं, आइए जानते हैं कैसे?

आयकर विभाग की नजर और SFT नियम

आयकर विभाग के पास आपके हर बड़े लेन-देन का रिकॉर्ड होता है। बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे एक तय सीमा से अधिक के खर्च की जानकारी विभाग को दें। इसे 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन' (SFT) कहा जाता है। यदि आप एक वित्त वर्ष में अपने क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का खर्च करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट सीधे इनकम टैक्स विभाग को भेज देता है। यदि आपने एक बार में 1 लाख रुपये या उससे अधिक का क्रेडिट कार्ड बिल 'कैश' में जमा किया है, तो भी विभाग को इसकी सूचना मिल जाती है।

आय और खर्च का तालमेल न बैठना

दिक्कत तब शुरू होती है जब आपके क्रेडिट कार्ड का सालाना खर्च आपकी घोषित आय (ITR) से ज्यादा हो जाता है। मान लीजिए आपकी सालाना आय 8 लाख रुपये है, लेकिन आपने दोस्तों की मदद के चक्कर में अपने कार्ड से साल भर में 12 लाख रुपये की खरीदारी कर ली। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग आपको नोटिस भेजकर यह पूछ सकता है कि आपकी आय से अधिक खर्च का पैसा कहां से आया? भले ही वह पैसा आपके दोस्तों ने आपको वापस कर दिया हो, लेकिन विभाग की नजर में वह आपकी 'अघोषित आय' मानी जा सकती है।

कैशबैक और रिफंड का चक्कर

अक्सर लोग दूसरों के लिए खरीदारी करते हैं और बदले में उनसे नकद (Cash) ले लेते हैं। यह सबसे खतरनाक स्थिति है। जब आप अपने बैंक खाते में वह नकद जमा करते हैं, तो डिजिटल ट्रेल में यह आपकी कमाई की तरह दिखता है। विभाग इसे टैक्स चोरी का प्रयास मान सकता है। यदि आपके पास ठोस सबूत नहीं है कि वह पैसा किसी और का है, तो आपको उस राशि पर भारी जुर्माना और टैक्स देना पड़ सकता है।

सिबिल स्कोर और जिम्मेदारी

सिर्फ इनकम टैक्स ही नहीं, दूसरों को कार्ड देने से आपका 'क्रेडिट स्कोर' (CIBIL) भी प्रभावित हो सकता है। यदि आपके दोस्त ने खर्च करने के बाद समय पर आपको पैसे नहीं दिए और आपका बिल पेमेंट लेट हो गया, तो इसका सीधा असर आपके रिकॉर्ड पर पड़ेगा। कानूनी तौर पर क्रेडिट कार्ड एक व्यक्तिगत अनुबंध है, और इसके जरिए होने वाले हर ट्रांजेक्शन के लिए कार्डधारक ही जिम्मेदार होता है।

इनकम टैक्स के झंझटों से बचने के लिए सबसे बेहतर यही है कि अपना क्रेडिट कार्ड केवल अपने व्यक्तिगत खर्चों तक सीमित रखें। यदि कभी बहुत जरूरी हो, तो सुनिश्चित करें कि पैसा नकद लेने के बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए लें और उस ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट या रिकॉर्ड संभाल कर रखें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपको लंबे कानूनी चक्करों और भारी जुर्माने में डाल सकती है। वित्तीय अनुशासन ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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