Lab Grown Diamond Price: हीरा एक ऐसी नायाब चीज है, जिसकी कीमत के बारे में सोचते ही लाखों रु का विचार आता है। नेचुरल हीरे वाकई बहुत महंगे होते हैं। पर इनका अब एक विकल्प भी खूब चर्चा में है। ये हैं लैब में बने हीरे (Lab Grown Diamond), जो नेचुरल हीरों से बहुत सस्ते होते हैं। हाल ही में अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने फर्स्ट लेडी जिल बिडेन (Jill Biden) को 7.5 कैरेट का लैब में डेवलप किया गया हीरा गिफ्ट किया। इससे लैब में बने हीरे सुर्खियों में आ गए।
लैब में बने हीरे ईको-फ्रेंडली और कॉस्ट इफेक्टिव होते हैं। एक नेचुरल हीरा लैब में तैयार हीरे से लगभग 20 गुना अधिक कार्बन उत्सर्जित करता है। लैब में बने हीरों की कीमत नेचुरल हीरों से बहुत कम होती है।
70 फीसदी तक सस्ते
रिपोर्ट्स के अनुसार लैब में डेवलप किए जाने वाले हीरे नेचुरल हीरों के मुकाबले 50 से 70 फीसदी तक सस्ते होते हैं। कीमत का यह अंतर कई फैक्टरों पर आधारित है। जैसे कि खदानों से निकले हीरों की मांग लैब में बने हीरों की तुलना में बहुत अधिक रहती है। इनकी सप्लाई भी सीमित रहती है।
क्या होता है अंतर
कुछ मिथ्य हैं, जो लैब में डेवलप हुए हीरों के बारे में चर्चा में रहते हैं। कहा जाता है कि लैब में बने हीरे नकली होते हैं। मगर ये खनन किए गए हीरों के समान रासायनिक, फिजिकल और ऑप्टिकल क्वालिटी वाले होते हैं।
अकसर इन दोनों तरह के हीरों की क्वालिटी अलग-अलग बताई जाती है। मगर ऐसा नहीं है। दोनों में समान केमिकल क्वालिटी होती है। इसलिए एक्सपर्ट्स के लिए भी इनमें अंतर करना मुश्किल होता है।
टिकाऊ होते हैं या नहीं
ये भी एक मिथ्य है कि लैब में बने हीरे टिकाऊ या मजबूत नहीं होते। मगर असल में लैब में डेवलप हुए हीरे में भी हार्डनेस होती है और ये नेचुरल हीरे की तरह ही टिकाऊ होते हैं।
बजट 2023 में लैब में तैयार हीरों पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन हीरों पर से 5 प्रतिशत शुल्क हटाने की घोषणा की।
