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जनवरी में अबतक शेयर बाजार निवेशकों के 25 लाख करोड़ स्वाहा, क्या ये गिरावट की सिर्फ शुरुआत है?

शेयर बाजार में बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। 5 दिन में निफ्टी में 512 अंकों की बड़ी गिरावट आई है। आज 353 अंक टूटकर बंद हुआ है। इसी तरह सेंसेक्स में भी 1065 अंकों की गिरावट है। इस गिरावट के कारण निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं।

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शेयर बाजार में कोहराम

शेयर बाजार में चारों तरफ हाहाकार है। बड़े से छोटे स्टॉक्स में जबरदस्त बिकवाली है। स्टॉक मार्केट निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करें? हर नए दिन के साथ पोर्टफोलियो की वैल्यू घटती जा रही है। शेयर बाजार में भारी बिकवाली से जनवरी महीने में अबतक निवेशकों के 25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए हैं। बता दें कि 2 जनवरी को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,81,24,779 करोड़ रुपये था। आज 20 जनवरी को यह घटकर 4,55,72,957 करोड़ रह गया है। इस तरह निवेशकों के 25 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा नहीं कि आगे गिरावट नहीं होगी। वैश्विक हालात जिस तरह से बने हुए हैं, उससे बाजार में और बड़ी गिरावट आ सकती है। इसलिए निवेशकों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। कोई भी नया निवेश अभी करने से बचना चाहिए। ट्रंप टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता में सुधार के बाद ही बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद है।

क्यों टूट रहा भारतीय शेयर बाजार?

1. ट्रेड वॉर बढ़ने का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने पर आक्रामक रुख अपनाने के संकेत के बाद निवेशक बदलती भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर ज्यादा चिंतित दिख रहे हैं। उन्होंने इस कदम का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। जवाब में, यूरोपीय नेताओं ने कथित तौर पर अमेरिकी दबाव के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। इस कदम से बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे बिकवाली बढ़ी है।

2. Q3 के मिले-जुले नतीजे

Q3 के नतीजे अब तक मिले-जुले रहे हैं, जिसका एक कारण नए श्रम कानूनों का एक बार का प्रभाव है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर नतीजे के बीच भू-राजनीतिक चिंताओं से पहले से ही दबे हुए बाजार के सेंटिमेंट को उठाने में मदद नहीं मिली है। जब ऑटो कंपनियों के नतीजे आने शुरू होंगे, तो इसमें बदलाव होने की संभावना है।

3. भारी FII बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयर बेच रहे हैं। जनवरी में अब तक, उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार सौदे पर लगातार अनिश्चितता, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, और कमाई-वैल्यूएशन में बेमेल के बीच कैश सेगमेंट में ₹29,000 करोड़ से अधिक के भारतीय शेयर बेचे हैं।

4. सुरक्षित निवेश की ओर रुख

बढ़े हुए भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक जोखिमों ने जोखिम भरे इक्विटी के लिए संभावनाओं को कम कर दिया है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश संपत्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। सोने और चांदी में रिकॉर्ड तोड़ रैली निवेशकों को शेयरों में मुनाफा बुक करने और कीमती धातुओं में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, टैरिफ युद्ध और अमेरिकी फेड दर में कटौती की उम्मीदों के बीच और अधिक लाभ के लिए तैयार दिख रही हैं।

5. यूनियन बजट 2026

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 फरवरी को बजट से पहले मार्केट का सेंटिमेंट भी सतर्क है, क्योंकि उम्मीदें ज्यादा हैं कि सरकार आर्थिक ग्रोथ, रोज़गार पैदा करने और कंज्यूमर डिमांड को बढ़ाने के लिए उपायों की घोषणा करेगी। हालांकि सरकार से ग्रोथ और फिस्कल कंसोलिडेशन के बीच बैलेंस बनाए रखने की व्यापक उम्मीद है, लेकिन यह अटकलें कि फिस्कल कंसोलिडेशन पर ज़्यादा ज़ोर देने से सरकारी पूंजीगत खर्च में कमी आ सकती है, निवेशकों को सतर्क रख रही हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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