Jonnagiri Gold Mine : आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित जोंनागिरी गोल्ड माइन का बुधवार (25 जून 2026) को औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह भारत की आजादी के बाद पहली बार है जब प्राइवेट सेक्टर की किसी कंपनी द्वारा कॉमशियल स्तर पर सोने की खदान (Indian First Private Gold Mine) शुरू की गई है। इस परियोजना का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N Chandrababu Naidu और B Prabhakaran ने संयुक्त रूप से किया। यह कदम भारत के खनन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक देश में सोने का उत्पादन सीमित स्तर पर ही होता रहा है और भारी मात्रा में आयात पर निर्भरता बनी हुई थी।
खदान का स्थान और परियोजना डिटेल
एएनआई के मुताबिक यह सोने की खदान कुरनूल जिले के तुग्गली मंडल के जोंनागिरी, एर्रागुड़ी और पगिदिराई गांवों के क्षेत्र में फैली हुई है। इस परियोजना को विकसित करने में Geomysore Services India Pvt Ltd की अहम भूमिका रही है। इसके अलावा इसे Lloyds Metals & Energy और Thriveni Group का समर्थन प्राप्त है। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। खदान का क्षेत्रफल करीब 598 हेक्टेयर है, जो इसे एक बड़े पैमाने की खनन परियोजना बनाता है।
उत्पादन क्षमता और संसाधन
कंपनी के अनुसार, इस खदान से हर साल करीब 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना (refined gold) उत्पादन होने की उम्मीद है। वर्तमान में यहां करीब 13.1 टन सोने के प्रमाणित भंडार (certified reserves) मौजूद हैं। इसके अलावा आगे की खोज और सर्वे में और भी अधिक सोने के भंडार मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस खदान का अनुमानित जीवनकाल करीब 15 वर्ष बताया गया है, यानी यह लंबे समय तक उत्पादन कर सकेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाएगी।
भारत की आयात निर्भरता में कमी की उम्मीद
भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देशों में से एक है। हर साल देश करीब 700 से 1,000 टन सोना विदेशों से आयात करता है ताकि घरेलू मांग पूरी हो सके। ऐसे में जोंनागिरी गोल्ड माइन जैसी परियोजनाएं भारत की आयात निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती हैं। कंपनी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट देश में स्वदेशी सोने के उत्पादन को बढ़ावा देगा और मेक इन इंडिया और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को मजबूत करेगा।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ
इस परियोजना से क्षेत्र में कई प्रकार के रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है। खनन, प्रसंस्करण, परिवहन और सप्लाई चेन से जुड़े कामों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा यह परियोजना आसपास के छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा देगी। सरकार को रॉयल्टी और टैक्स के रूप में राजस्व प्राप्त होगा, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को भी लाभ मिलेगा।
कंपनी और नेतृत्व का बयान
उद्घाटन के मौके पर B Prabhakaran ने कहा कि यह परियोजना भारत के सोना खनन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से सोने का बड़ा उपभोक्ता रहा है, लेकिन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी का लक्ष्य केवल एक खदान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में एक मजबूत और टिकाऊ गोल्ड इकोसिस्टम बनाना है, जो रोजगार, आर्थिक विकास और संसाधन सुरक्षा में योगदान दे सके।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान समय में जब वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं और अस्थिरता बनी हुई है, ऐसे में घरेलू उत्पादन का महत्व और बढ़ जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं भारत को लॉन्गटर्म रूप से मजबूत स्थिति में ला सकती हैं। सरकार और कंपनियों को उम्मीद है कि जोंनागिरी गोल्ड माइन की सफलता के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी सोने की खोज और खनन परियोजनाएं बढ़ेंगी। जोंनागिरी गोल्ड माइन का शुभारंभ भारत के खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल देश की सोने की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।
