Gold-Silver Price Crash: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है और यह अब करीब दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया और शुरुआती एशियाई कारोबार में करीब 4,085 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा। सोने की सर्वकालिक उच्च कीमत 5,589.38 डॉलर प्रति औंस पर 28 जनवरी, 2026 को पहुंची थी, चांदी 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई तक पहुंची थी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना इस साल 29 जनवरी को 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा था। वहीं चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलो का नया रिकॉर्ड बनाया था। आज 24 जून 2026 को सोना 1,44,000 रुपये और चांदी 2,23,000 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि सोना अब अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 24% से अधिक नीचे (gold price crash) आ चुका है। वहीं चांदी अपने ऊंचे स्तर से करीब 47% अधिक नीचे (Silver price crash) आ चुकी है। यह गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली है क्योंकि सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है।
शेयर बाजार में गिरावट का असर
सोने में गिरावट का एक बड़ा कारण वैश्विक शेयर बाजार, खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज बिकवाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेजी के बाद अब गिरावट देखी जा रही है। जब शेयर बाजार में निवेशकों को नुकसान होता है, तो कई निवेशक नकदी जुटाने के लिए अपने अन्य निवेश, जैसे सोना, भी बेच देते हैं। इस वजह से सोने पर दबाव बढ़ गया है। इस प्रक्रिया को लिक्विडिटी जुटाने के लिए बिकवाली कहा जाता है, जिससे सोने की कीमत और नीचे चली जाती है।
डॉलर मजबूत, सोना कमजोर
अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स लगातार ऊपर जा रहा है और अमेरिकी मुद्रा एक साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों में गिरावट आती है।
ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने की उम्मीद भी सोने पर भारी पड़ रही है। बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ब्याज दर बढ़ने पर निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर जाते हैं जो ब्याज या रिटर्न देते हैं। जबकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए उसकी आकर्षण कम हो जाती है। इस वजह से निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में लगा रहे हैं।
महंगाई के आंकड़ों पर नजर
अब बाजार की नजर अमेरिका के महंगाई से जुड़े नए डेटा पर है, जिसे PCE इंडेक्स कहा जाता है। यह फेडरल रिजर्व का सबसे अहम महंगाई संकेतक है। अगर यह डेटा उम्मीद से ज्यादा आता है, तो ब्याज दरें और बढ़ने की आशंका मजबूत हो सकती है। इससे सोने पर और दबाव पड़ सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव का असर कम
आमतौर पर युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और परमाणु निरीक्षण को लेकर विवाद बना हुआ है, फिर भी इसका असर सोने पर कम दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बाजार में ब्याज दर और डॉलर की स्थिति ज्यादा प्रभावशाली है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव पीछे चला गया है।
बड़ी तेजी के बाद तेज गिरावट
पिछले दो वर्षों में सोने ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। 2025 में इसमें 65% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी और 2024 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। लेकिन अब यह तेजी उलट गई है और सोना तिमाही आधार पर करीब 12% गिर चुका है, जो 2016 के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट आई है और यह अपने ऊंचे स्तर से करीब 47% नीचे आ चुकी है।
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की दिशा अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी। अगर महंगाई कम होती है, तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है और सोने को राहत मिल सकती है। लेकिन अगर महंगाई बनी रहती है और दरें बढ़ती हैं, तो सोने पर दबाव जारी रह सकता है। फिलहाल सोना कई बड़े दबावों में है। मजबूत डॉलर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और शेयर बाजार में बिकवाली। इन सभी कारणों से सोने की पारंपरिक “सुरक्षित निवेश” वाली छवि कमजोर पड़ती दिख रही है।
