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देश में घटी नौकरियां! मई में व्हाइट-कॉलर भर्तियों में 4 प्रतिशत की गिरावट

Job News: मई में भारत में व्हाइट-कॉलर नौकरियों की भर्ती सालाना 4% और मासिक 6% घटी, लेकिन विविधता आधारित नियुक्तियों में 21% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें महिलाओं और दिव्यांगों की भागीदारी बढ़ी।

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नौकरी भर्तियों में गिरावट, लेकिन विविधता आधारित नियुक्तियों में तेज बढ़ोतरी (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Job News : भारत में दफ्तरों में बैठकर काम करने वाले यानी व्हाइट-कॉलर पदों पर भर्ती गतिविधियों (white collar hiring) में कमी देखी गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में इन पदों पर होने वाली भर्तियों में पिछले साल की तुलना में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, अप्रैल की तुलना में भी भर्ती गतिविधियों में 6 प्रतिशत की कमी आई है। यह संकेत देता है कि कंपनियां मौजूदा आर्थिक और बाजार स्थितियों को देखते हुए नई नियुक्तियों में पहले से अधिक सावधानी बरत रही हैं। नियोक्ता फिलहाल तेजी से भर्ती करने के बजाय सोच-समझकर और जरूरत के अनुसार ही कर्मचारियों को जोड़ रहे हैं।

कई क्षेत्रों में धीमी भर्ती, कुछ में तेज गिरावट

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख उद्योगों में नौकरी की मांग कम हुई है, जिसका असर कुल भर्ती पर पड़ा है। आयात-निर्यात क्षेत्र में सबसे ज्यादा 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र में 18 प्रतिशत की कमी देखी गई। खुदरा क्षेत्र में 8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) सेक्टर में भी 8 प्रतिशत कम भर्तियां हुईं। इन सभी क्षेत्रों में धीमी गतिविधियों ने कुल नौकरी बाजार पर दबाव बनाया है।

कुछ क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि

जहां एक ओर कई सेक्टरों में गिरावट देखी गई, वहीं कुछ क्षेत्रों में अच्छी बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में सबसे अधिक 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा वाहन (ऑटोमोबाइल) सेक्टर में 12 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवा और फार्मा क्षेत्र में 11 प्रतिशत और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग और विस्तार के कारण नौकरी की जरूरत भी बढ़ी है।

विविधता आधारित भर्तियों में बड़ा उछाल

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विविधता (डाइवर्सिटी) पर आधारित भर्तियों में तेजी से वृद्धि हुई है। मई में ऐसी भर्तियों में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह दिखाता है कि कंपनियां अब केवल सामान्य भर्ती पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न वर्गों और समूहों को अवसर देने पर भी ध्यान दे रही हैं।

महिलाओं और दिव्यांगों की बढ़ती भागीदारी

डाइवर्सिटी आधारित भर्ती में महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत रही, जो एक बड़ा आंकड़ा है। इसके साथ ही दिव्यांगजनों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो वर्षों में यह तीन गुना बढ़कर 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके अलावा, एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय और न्यूरोडाइवर्स प्रतिभाओं को भी रोजगार देने की दिशा में कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है। कुल मिलाकर, विविधता और समावेश से जुड़ी भर्तियां अब इन सभी डाइवर्सिटी हायरिंग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन चुकी हैं।

कंपनियों की बदलती सोच

फाउंडइट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) तरुण सिन्हा ने कहा कि कुल मिलाकर भर्ती प्रक्रिया अब ज्यादा चयनात्मक हो गई है। कंपनियां केवल तत्काल जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि लंबे समय तक व्यवसाय को मजबूत बनाने वाली प्रतिभा में निवेश कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विविधता आधारित भर्ती अब केवल नियमों का पालन करने की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि इसे कंपनियां अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही हैं।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि भारत में व्हाइट-कॉलर नौकरी बाजार में सावधानी का माहौल है। जहां कई क्षेत्रों में भर्ती धीमी हुई है, वहीं कुछ सेक्टरों में अच्छी बढ़त देखी जा रही है। दूसरी ओर, विविधता और समावेश पर आधारित नियुक्तियों में तेजी यह संकेत देती है कि कंपनियां अब अधिक संतुलित और समावेशी कार्यबल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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