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देश के सबसे बड़े संभावित IPO में से एक जियो प्लेटफॉर्म्स का पब्लिक इश्यू फिलहाल अटक गया है। इसकी वजह सरकार की ओर से अभी तक नए मेगा-लिस्टिंग नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी न होना है। दरअसल, SEBI ने बड़ी कंपनियों के लिए IPO में न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम को आसान बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, लेकिन इसे लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय को सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशन रूल्स, 1957 में संशोधन की अधिसूचना जारी करनी होगी। जब तक यह नोटिफिकेशन गजट में प्रकाशित नहीं होता, तब तक जियो औपचारिक रूप से IPO की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकता।
क्यों अटका है IPO
SEBI के प्रस्ताव के मुताबिक जिन कंपनियों का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा होगा, उन्हें IPO में कम से कम 5% शेयर बेचने की जगह सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति मिल सकती है। इसका मकसद यह है कि बहुत बड़ी कंपनियों को बाजार में अत्यधिक बड़ा IPO लाने की जरूरत न पड़े। जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी कंपनियों के लिए यह नियम बेहद अहम माना जा रहा है।
दुनिया के सबसे बड़े IPO's में शामिल
इन्वेस्टमेंट बैंकों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन $170-180 अरब तक हो सकता है। ऐसे में यदि कंपनी सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी भी बेचती है, तो करीब $4-4.5 अरब (लगभग ₹35-37 हजार करोड़) जुटाए जा सकते हैं। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी सरकार की मंजूरी मिलते ही DRHP दाखिल करने की तैयारी में है और अप्रैल से पहले फाइलिंग की संभावना पर नजर रख रही है।
रिलायंस के शेयरहोल्डर्स पर असर
जियो के अलग लिस्ट होने से कुछ निवेशकों को डर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को “होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट” का सामना करना पड़ सकता है। यानी निवेशकों को सीधे जियो में निवेश का विकल्प मिलने से रिलायंस के वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है। हालांकि, कई ब्रोकरेज हाउस इस डर को ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा मानते हैं। उनका कहना है कि अगर IPO में सिर्फ 2.5% फ्री फ्लोट रहेगा तो शेयर की उपलब्धता कम होगी, जिससे जियो का शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर सकता है और यह असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है।
अब कब आ सकता है जियो IPO
फिलहाल पूरा मामला सरकार के नोटिफिकेशन पर टिका हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिसूचना 2026 की पहली छमाही में जारी हो सकती है। उसके बाद ही जियो औपचारिक तौर पर बैंकर्स नियुक्त करके IPO की प्रक्रिया शुरू करेगा। मुकेश अंबानी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि जियो का IPO 2026 की पहली छमाही में लाने की योजना है। अगर नियमों की मंजूरी जल्दी मिल जाती है तो यह टाइमलाइन संभव हो सकती है।
क्यों बाजार की नजर इस IPO पर
जियो प्लेटफॉर्म्स सिर्फ भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी ही नहीं बल्कि डिजिटल, OTT, AI और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम का भी बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुकी है। इसी वजह से जियो का IPO भारतीय बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर माना जा रहा है और निवेशकों को पिछले दशक की सबसे बड़ी ग्रोथ स्टोरी में सीधे निवेश का मौका दे सकता है।
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