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रथ यात्रा पर 17 करोड़ तो सैलरी पर 45 करोड़ का खर्च, बेहद खास है जगन्नाथ मंदिर का बजट

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 20, 2023, 11:27 AM IST

Jagannath Puri Temple Income, Net Worth 2023: जग्ननाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने इस बार पूरे साल के लिए 271 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इसमें 16.88 करोड़ रुपये रथ यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और प्रशासनिक काम के लिए 37.11 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है। इसके अलावा मंदिर के रिपेयरिंग और मेंटनेंस के लिए 37.11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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मंदिर प्रबंधन ने इस साल के लिए 271 करोड़ रुपये का बजट पास किया है।

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Jagannath Puri Temple Income, Net Worth 2023: पुरी में आज से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है। रात में भगवान जगन्नाथ , बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निकलेंगे। अगले दिन वह अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर जाएंगे । और 12 दिन मौसी के घर के रहने के बाद वापस जगन्नाथ मंदिर लौट आएंगे। हर बार की तरह यात्रा के लिए इस बार भी तीन भव्य रथ बनाए गए हैं। पहले रथ में भगवान जगन्नाथ, दूसरे रथ में बलराम और तीसरे रथ में बहन सुभद्रा सवार होती है। इस बार की रथ यात्रा पर करीब 17 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

884 लकड़ियों का इस्तेमाल

तीनों रथों को बनाने में खास ध्यान रखा जता है। इसके लिए खास तरह के 884 पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल होता है। और रथ बनाने के लिए लकड़ियों को काटने का काम सोने की कुल्हाड़ी से शुरू किया जाता है। और रथ बनने में पूरे दो महीने का वक्त लगता है। जग्ननाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने इस बार पूरे साल के लिए 271 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इसमें 16.88 करोड़ रुपये रथ यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और प्रशासनिक काम के लिए 37.11 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है। इसके अलावा मंदिर के रिपेयरिंग और मेंटनेंस के लिए 37.11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

176 करोड़ रुपये हुई कमाई

साल 2022-23 में जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन को कुल 176 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इसमें 20 करोड़ रुपये उत्खनन आदि, 36.5 करोड़ रुपये हुंडी और सामान्य दान, 60.28 करोड़ रुपये ब्याज से आय और 50 करोड़ रुपये जमीन की खरीद-बिक्री से कमाई हुई है। प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार विभिन्न मदों में करीब 262 करोड़ रुपये का खर्च होगा। इसके अलावा साल 2022-23 में मंदिर को सरकार से करीब 73 करोड़ रुपये अनुदान के रुप में मिले हैं।

यात्रा का शेड्यूल

  • जगन्नाथ रथ यात्रा का प्रारंभ: 20 जून
  • बहुदा यात्रा: 28 जून, गुंडिचा मंदिर से पुरी मंदिर की ओर होगी जगन्नाथ रथ यात्रा।
  • सुना बेशा रस्म: 29 जून,भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा को आभूषण पहनाए जाएंगे।
  • अधर पना रस्म: 30 जून, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को अधर पना पिलाया जाएगा ।
  • नीलाद्री बिजे रस्म: 1 जुलाई, को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान किया जाएगा।
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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