अगर आपका इनकम टैक्स रिफंड महीनों से अटका पड़ा है और हर दिन बैंक खाते का बैलेंस चेक करते-करते परेशान हो चुके हैं, तो ये खबर आपको थोड़ी राहत दे सकती है। सीबीडीटी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि लंबित रिफंड्स जल्द ही क्लियर होने वाले हैं। यानी इंतजार अब ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि किस दिन आपके अकाउंट में रिफंड आने की उम्मीद है।
कब आएगा रिफंड?
इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी पेंडिंग रिफंड इस महीने या अगले महीने तक जारी कर दिए जाएंगे। यह जानकारी सीबीडीटी चीफ रवि अग्रवाल ने दी। उन्होंने बताया कि छोटे और कम राशि वाले रिफंड पहले ही जारी कर दिए गए हैं। लेकिन जब बड़े (हाई-वैल्यू) रिफंड की फाइलें चेक की गईं, तो कई मामलों में गलत दावे पाए गए। इसलिए ऐसे टैक्सपेयर्स को ई-मेल भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग की सलाह है कि जिन लोगों को ई-मेल मिला है, वे जल्दी से जानकारी अपडेट कर दें, ताकि रिफंड प्रोसेस में कोई देरी न हो।
कैसे हो रही है रिफंड की प्रोसेसिंग?
सीबीडीटी के मुताबिक, हर रिफंड को ध्यान से एनालाइज किया जा रहा है। जैसे ही किसी रिफंड को “ग्रीन चैनल” में शामिल किया जाता है, उसे तुरंत रिलीज कर दिया जाता है। यानी जिनकी डिटेल्स सही हैं, उन्हें जल्द रिफंड मिल जाएगा। विभाग पूरी कोशिश कर रहा है कि अगले महीने तक सभी रिफंड जारी कर दिए जाएं।
ITR और इनकम टैक्स नियमों में होने वाले बदलाव
सीबीडीटी चीफ ने यह भी बताया कि जनवरी तक नया सरल ITR फॉर्म और नए टैक्स नियम नोटिफाई किए जाएंगे। ये नियम Income Tax Act, 2025 के अंतर्गत होंगे और 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसका मकसद है कि टैक्सपेयर्स को पहले ही बदलावों की जानकारी मिल जाए, ताकि वे अपने सिस्टम में समय रहते तैयारियां कर सकें।
IITF में टैक्सपेयर लाउंज लॉन्च करते समय उन्होंने कहा कि नए फॉर्म को इतना सरल बनाया जा रहा है कि हर व्यक्ति उसे आसानी से समझकर भर सके। विभाग चाहता है कि नए कानून के तहत रिटर्न फाइलिंग आसान और बिना झंझट के हो।
Income Tax Act 2025 में क्या बड़े बदलाव किए गए?
नया कानून पुराने और जटिल 1961 के इनकम टैक्स एक्ट की तुलना में काफी सरल और समझने में आसान बनाया गया है। इसके तहत कई बड़े संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। पहले जहां एक्ट में 819 सेक्शन थे, उन्हें घटाकर अब 536 किया गया है। इसी तरह चैप्टर की संख्या भी 47 से कम करके 23 कर दी गई है। कानून की भाषा को भी हल्का किया गया है पहले इसमें कुल 5.12 लाख शब्द थे, जिन्हें घटाकर अब सिर्फ 2.6 लाख शब्द कर दिया गया है। टैक्सपेयर की सुविधा बढ़ाने के लिए 39 नए टेबल और 40 नए फॉर्मूले भी शामिल किए गए हैं। कुल मिलाकर, नए कानून का उद्देश्य है कि टैक्स नियमों को आसान, कम जटिल और हर आम टैक्सपेयर के लिए ज्यादा समझने लायक बनाया जाए।
कर दरों में कोई बदलाव नहीं
ध्यान देने वाली बात है कि नए कानून में कोई नई टैक्स दर लागू नहीं की गई है। सिर्फ भाषा और संरचना को सरल किया गया है, ताकि टैक्सपेयर्स को 1961 के पुराने कानूनों की तरह जटिल चीजें न झेलनी पड़ें।
नया इनकम टैक्स कानून आने वाले वित्त वर्ष से भारत की टैक्स प्रणाली को हल्का, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली बनाने का दावा करता है। रिफंड जल्दी मिलेंगे और ITR फाइलिंग पहले से कहीं आसान हो जाएगी। टैक्सपेयर्स को बस यह सुनिश्चित करना है कि विभाग द्वारा भेजे गए ई-मेल पर समय से कार्रवाई करें, ताकि उनका रिफंड बिना रुकावट मिल सके।
