Iran vs US war: अमेरिका और इजरायल जैसे सुपर पावर से ईरान डट कर मुकाबला कर रहा है। इस युद्ध चलते हुए 37 दिन हो गए हैं लेकिन ईरान हार मारने को तैयार नहीं है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका में महंगाई से लेकर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। पेंटागन ने ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि की मांग की है, क्योंकि युद्ध से अमेरिकी खजाने पर भारी दबाव पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर ईरान बिना किसी 'शोर-शराबा' और वित्तीय मांगे युद्ध कर रहा है। आखिर, इतने बड़े युद्ध का खर्च ईरान कहां से उठा रहा है? ईरान के पास पैसे का क्या स्रोत है? आइए समझते हैं।
'भूतिया जहाज' से अरबों डॉलर की कमाई
ईरान पर तेल बेचने पर पाबंदी है, लेकिन वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है। ईरान ने इससे बचने के लिए 'भूतिया जहाज (Dark Fleet) तैयार किया है। ये ऐसे पुराने तेल टैंकर हैं जो समंदर के बीच में अपनी पहचान (GPS) बंद कर देते हैं। आजकल ये जहाज केवल सिग्नल बंद नहीं करते, बल्कि 'स्पूफिंग' (Spoofing) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे अपने जीपीएस सिग्नल के साथ छेड़छाड़ करते हैं जिससे सैटेलाइट को लगता है कि जहाज फारस की खाड़ी में खड़ा है, जबकि हकीकत में वह तेल की डिलीवरी करने के लिए हजारों मील दूर किसी दूसरे देश के पास होता है।ये जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपना तेल दूसरे जहाजों में शिफ्ट कर देते हैं। इसके बाद इस तेल को 'मलेशियाई' या 'ओमानी' तेल बताकर चीन और अन्य एशियाई देशों को बेचा जाता है। अकेले चीन को तेल बेचकर ईरान सालाना अरबों डॉलर कमा रहा है।
ईरान के इन भूतिया जहाजों की आखिरी मंजिल अक्सर चीन के छोटे और स्वतंत्र रिफाइनर (जिन्हें 'Teapots' कहा जाता है) होते हैं। चूंकि चीन अमेरिका के इन प्रतिबंधों को पूरी तरह नहीं मानता, इसलिए वह भारी 'डिस्काउंट' पर ईरान से यह तेल खरीदता है। यह पूरा लेनदेन डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा 'युआन' में या फिर 'बार्टर सिस्टम' (सामान के बदले तेल) के जरिए होता है, जिससे अमेरिका का बैंकिंग सिस्टम इसे रोक नहीं पाता।
एक अनुमान के अनुसार, ईरान आज भी इन 'भूतिया जहाजों' के जरिए रोजाना 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल बेच रहा है, जिससे उसके पास अरबों डॉलर का फंड आ रहा है।
'शैडो बैंकिंग' का मकड़जाल
ईरान ने दुनिया भर में खासकर दुबई, तुर्की और हॉन्गकॉन्ग में हजारों 'फ्रंट कंपनियां' बना रखी हैं। ये कंपनियां कागजों पर तो साधारण व्यापार (जैसे कपड़ा या इलेक्ट्रॉनिक्स) करती हैं, लेकिन असल में ये ईरान के फंड को इधर-से-उधर घुमाने का काम करती हैं। यह एक तरह का 'ग्लोबल हवाला नेटवर्क' है जिसे ट्रैक करना नामुमकिन जैसा है।
बिटकॉइन माइनिंग का हब
जब डॉलर के दरवाजे बंद हुए, तो ईरान ने क्रिप्टोकरेंसी को अपनी ढाल बना लिया। ईरान के पास प्राकृतिक गैस की प्रचुरता है, जिससे वह बहुत सस्ती बिजली पैदा करता है। इस सस्ती बिजली का उपयोग बड़े पैमाने पर बिटकॉइन माइनिंग के लिए किया जाता है। ईरान इस डिजिटल पैसे का इस्तेमाल उन हाई-टेक हथियारों और कलपुर्जों को खरीदने के लिए करता है जिन्हें डॉलर में खरीदना प्रतिबंधित है।
ईरान एक पश्चिम एशियाई देश है जो महाद्वीप के पश्चिमी छोर पर स्थित है और लगभग 636,372 वर्ग मील के क्षेत्र में फैला हुआ है। विश्व बैंक के अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर है और इसे मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। वर्ष 2017 में, ईरान का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग $447.7 बिलियन था। ईरानी अर्थव्यवस्था के कुछ मुख्य प्राकृतिक संसाधनों में तेल, कृषि योग्य भूमि, प्राकृतिक गैस, कृषि और जस्ता (zinc) एवं लौह अयस्क जैसे खनिज शामिल हैं।
पिस्ता, केसर और फल से भी बंपर कमाई
पिस्ता ईरान के आवश्यक प्राकृतिक कृषि संसाधनों में से एक है। ईरान में पिस्ता सबसे अधिक देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में नखलिस्तान (oases) के आसपास उगाया जाता है। ईरान दुनिया में पिस्ता का सबसे बड़ा उत्पादक है और यह दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक पिस्ता निर्यात करता है। केसर भी ईरान के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक कृषि संसाधनों में से एक है, जो मुख्य रूप से देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में उगाया जाता है। ईरान का केसर अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाला होता है और इसे संयुक्त अरब अमीरात, स्पेन और फ्रांस जैसे विभिन्न देशों को बेचा जाता है। ईरान में उगाए जाने वाले केसर का एक बड़ा हिस्सा खुरासान रजवी (Khorasan Razavi) प्रांत से आता है।
फल ईरान के सबसे महत्वपूर्ण कृषि संसाधनों में से कुछ हैं, और यह राष्ट्र मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के देशों के बीच फलों का सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, ईरान को पहले दुनिया के आठवें सबसे बड़े फल उत्पादक के रूप में स्थान दिया गया है। अनार के उत्पादन में ईरान दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि खजूर के उत्पादन में यह दुनिया में दूसरे स्थान पर है। कई फलों की उत्पत्ति ईरान से मानी जाती है, जैसे खरबूजा, अनार, नींबू और फारसी अखरोट।

ईरान बनाम अमेरिका
अमेरिका के सामने कहां ठहरता है ईरान?
ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं आकार, संरचना और आय के स्रोतों के मामले में एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। ईरान की जीडीपी लगभग 475 अरब डॉलर है। वहीं, अमेरिका की अर्थव्यवस्था विशाल है, जिसकी जीडीपी लगभग 31.82 खरब डॉलर की है। इसका अर्थ है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ईरान की तुलना में कई गुना बड़ी है और सालाना कहीं अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती है। आकार का यह अंतर अमेरिका की बड़ी आबादी, मजबूत औद्योगिक क्षमता और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाता है। ईरान का राष्ट्रीय ऋण लगभग 158.27 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जो कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका पर लगभग 39 खरब डॉलर का राष्ट्रीय ऋण है, जो दुनिया में सबसे बड़े ऋणों में से एक है।
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