मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच जारी संघर्ष की तपिश अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी आंच सीधे आम आदमी की रसोई और उसकी पसंदीदा स्ट्रीट फूड की दुकानों तक पहुंच गई है। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने और कच्चे तेल के साथ-साथ गैस की कीमतों में आई उछाल ने दिल्ली-एनसीआर के खान-पान का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली और नोएडा की सड़कों पर मिलने वाली चाय, पराठे और बिरयानी की कीमतों में अचानक 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और बढ़ती लागत है।
चाय पराठा-बिरयानी सब महंगी
नोएडा की फिल्म सिटी, जो अपनी चहल-पहल और स्ट्रीट फूड के लिए मशहूर है, वहां महंगाई का असर साफ दिख रहा है। फिल्म सिटी में बिरयानी की दुकान चलाने वाले बताते हैं, "साहब, गैस सिलेंडर मिल नहीं रहा और जो मिल रहा है वो बहुत महंगा पड़ रहा है। पहले हम 50 रुपये में जो बिरयानी की प्लेट देते थे, मजबूरी में अब उसे 60 रुपये करना पड़ा है। ग्राहक कम हो गए हैं, लेकिन पुरानी कीमत पर बेचना अब हमारे बस में नहीं है।"
यह स्थिति केवल बिरयानी वालों की नहीं है, बल्कि सुबह-सुबह दफ्तर जाने वालों की पसंदीदा 'चाय' भी अब कड़वी लगने लगी है। फिल्म सिटी के एक चाय विक्रेता ने बताया कि दूध और गैस की महंगाई की वजह से जो चाय पहले 15 रुपये की मिलती थी, अब उसके लिए 20 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
सीताराम के छोले-भटूरे की दूकान भी बंद
हैरानी की बात तो यह है कि महंगाई की मार सिर्फ छोटी दुकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के मशहूर 'सीताराम दीवानचंद' जैसे बड़े नाम भी इस संकट की चपेट में हैं। पहाड़गंज और दिल्ली की अन्य मशहूर छोले-भठूरे की दुकानों पर गैस की कमी का ऐसा असर पड़ा है कि कई जगह काम अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। कमर्शियल गैस की भारी शॉर्टेज की वजह से सीताराम दीवानचंद जैसे आउटलेट्स पर ताले लटके नजर आए या वहां बोर्ड लगा दिया गया कि गैस की कमी के कारण छोले-भठूरे उपलब्ध नहीं हैं। छोले-भठूरे को बनाने में लगने वाली ज्यादा आंच और गैस की खपत इस समय दुकानदारों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है।

Chole Bhature
केवल कढ़ी-चावल
दिल्ली के एक और मशहूर फ़ूड स्टॉल के मालिक का कहना है, "हमारे पास गैस का स्टॉक खत्म होने वाला है। भठूरे तलने के लिए लगातार तेज आंच चाहिए होती है। इसलिए हमने फिलहाल मेनू बदल दिया है। अब हम केवल कढ़ी-चावल या ऐसी चीजें बना रहे हैं जो कम गैस में तैयार हो सकें। कई दुकानों के बाहर तो बाकायदा 'कढ़ी-चावल उपलब्ध है' के पोस्टर लग गए हैं और आलू पराठा या पूरी-सब्जी को लिस्ट से हटा दिया गया है।" आलू पराठा बेचने वालों ने भी अपने दाम 10 रुपये तक बढ़ा दिए हैं, जिससे एक आम कर्मचारी का लंच अब 20-30% महंगा हो गया है।

Kadhi Chawal
यही नहीं कई शहरों में गोलगप्पे भी महंगे हो हैं। लोगों का कहना है कि जो गोलगप्पे पहले 20 के 6 या 5 मिलते थे वो अब कम हो गए हैं। इसी तरह बाकि कई चीजों पर ईरान वॉर की वजह से एलपीजी संकट का असर साफ़ दिख रहा है।
इस संकट की जड़ ईरान संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मची उथल-पुथल है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और समुद्री रास्तों में तनाव के कारण गैस और तेल के टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में प्रशासन ने सप्लाई को 'कंट्रोल्ड' कर दिया है, जिसका सीधा असर रेस्टोरेंट्स और ढाबों पर पड़ा है। जब ईंधन महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी बढ़ती है, जिससे सब्जी, मसाले और अनाज के दाम भी ऊपर चले जाते हैं।
