शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 12 अक्टूबर तक छह प्रतिशत बढ़ा (तस्वीर-istock)
Direct Tax Collection : चालू वित्त वर्ष 2025-26 में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ने मजबूती दिखाई है। 12 अक्टूबर 2025 तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 6.33 प्रतिशत बढ़कर 11.89 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण कॉरपोरेट कर संग्रह में वृद्धि और रिफंड राशि में आई कमी है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 12 अक्टूबर के बीच कुल 2.03 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत कम है। रिफंड में आई इस कमी ने शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह को बढ़ाने में योगदान दिया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 12 अक्टूबर 2025 के दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 5.02 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.92 लाख करोड़ रुपये था। वहीं गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह जिसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत आयकर शामिल होता है। 6.56 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक साल पहले की तुलना में अच्छी वृद्धि (पिछले वर्ष 5.94 लाख करोड़) दर्शाता है।
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) संग्रह में भी मामूली वृद्धि देखने को मिली है। इस वर्ष अब तक इसका संग्रह 30,878 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 30,630 करोड़ रुपये था।
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा के मुताबिक अगर रिफंड जारी करने से पहले के सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह की बात करें, तो यह चालू वित्त वर्ष में 13.92 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 2.36 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, शुद्ध संग्रह यानी रिफंड की कटौती के बाद 11.89 लाख करोड़ रुपये पर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.33 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 25.20 लाख करोड़ रुपये रखा है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 12.7 प्रतिशत अधिक है। अब तक प्राप्त शुद्ध संग्रह इस लक्ष्य का लगभग 47 प्रतिशत हो चुका है, जो यह दर्शाता है कि सरकार लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में सही गति से आगे बढ़ रही है।
इस बढ़ते प्रत्यक्ष कर संग्रह से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे।