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2030 तक होगी 'जेनरेशन X' की धूम, कर सकता है 500 अरब डॉलर की खपत, रिपोर्ट में दावा

Generation X Consumption Boom: रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार भारत की जेनरेशन एक्स (45-60 वर्ष) की आबादी 2030 तक 500 अरब डॉलर की खपत कर सकती है। यह पीढ़ी अब बचत के बजाय प्रीमियम, टिकाऊ उत्पादों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च को प्राथमिकता दे रही है। आर्थिक स्थिरता और डिजिटल आत्मविश्वास के कारण यह वर्ग लग्जरी यात्रा और भविष्य-केंद्रित शिक्षा में भारी निवेश कर रहा है।

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जेनरेशन एक्स आबादी 2030 तक कर सकती है 500 अरब डॉलर की खपत (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Generation X Consumption Boom : जेनरेशन एक्स' (Gen X) भारत की अर्थव्यवस्था में अब एक नया पावरहाउस उभरकर सामने आ रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 45 से 60 वर्ष की आयु वाले इस वर्ग की खपत साल 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 42 लाख करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर सकती है। सलाहकार फर्म 'रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स' का अनुमान है कि यह पीढ़ी अब केवल बचत करने के बजाय प्रीमियम और टिकाऊ उत्पादों पर दिल खोलकर खर्च कर रही है।

आर्थिक रूप से मजबूत और डिजिटल रूप से एक्टिव

जेनरेशन एक्स की सबसे बड़ी खासियत उनकी वित्तीय स्थिरता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रेडसीर के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया के अनुसार, यह पीढ़ी आज आर्थिक रूप से सबसे अधिक सुरक्षित स्थिति में है। वे न केवल डिजिटल रूप से आत्मविश्वासी हैं, बल्कि अपनी पसंद और प्राथमिकताओं को लेकर भी काफी स्पष्ट हैं। अब उनका ध्यान 'सिर्फ खर्च' करने के बजाय 'बेहतर अनुभव' और 'लंबे समय तक चलने वाली गुणवत्ता' पर है। यही कारण है कि वे घर, यात्रा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रीमियम विकल्पों को चुन रहे हैं।

सेहत ही सबसे बड़ी पूंजी

रिपोर्ट का एक बेहद चौंकाने वाला और सकारात्मक पहलू स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है। अब लोग बीमार होने के बाद इलाज कराने के बजाय, बीमार न पड़ने (निवारक स्वास्थ्य सेवा) पर अधिक खर्च कर रहे हैं।

  • प्रिवेंटिव हेल्थकेयर: इस क्षेत्र में 17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि (CAGR) देखी जा रही है। अनुमान है कि 2030 तक यह खर्च 73 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
  • न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट्स: पोषक तत्वों और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की मांग 25 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रही है। 2030 तक इस सेगमेंट का बाजार 20 अरब डॉलर का हो सकता है।
इस पीढ़ी का मुख्य उद्देश्य लंबी उम्र के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को बेहतर बनाना है।

लग्जरी ट्रैवल और प्रीमियम लाइफस्टाइल का क्रेज

पुराने समय के विपरीत, आज की जेन एक्स पीढ़ी आरामदायक और शानदार छुट्टियों पर खर्च करने से पीछे नहीं हट रही है। रिपोर्ट बताती है कि इस वर्ग के बीच 'लग्जरी विला' और 'बुटीक होटल्स' की मांग में सालाना 25 प्रतिशत का उछाल देखा जा रहा है। वे अब साधारण होटलों के बजाय ऐसे अनुभवों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें विशिष्टता और आराम का अहसास कराएं। इसके अलावा, सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल (Beauty & Personal Care) के क्षेत्र में भी इनका योगदान 2030 तक 8 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

शिक्षा को 'भविष्य का निवेश' मानती है यह पीढ़ी

भारतीय माता-पिता के लिए बच्चों की शिक्षा हमेशा से प्राथमिकता रही है, लेकिन जेन एक्स इसे एक बड़े 'भविष्य-केंद्रित निवेश' के रूप में देख रही है।

  • महंगी शिक्षा: शहरी क्षेत्रों में समृद्ध परिवार प्रति बच्चा सालाना 10 से 20 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं।
  • ग्लोबल एक्सपोजर: अब रुझान स्थानीय बोर्ड के बजाय कैंब्रिज, इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) और विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी वाले कार्यक्रमों की तरफ बढ़ रहा है। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहें।

बाजार के लिए बड़ा अवसर

कुल मिलाकर, रेडसीर की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भारतीय बाजार अब केवल युवाओं (Gen Z या Millennials) के भरोसे नहीं है। 45-60 वर्ष का यह आयु वर्ग एक ऐसे 'गोल्डन एरा' में प्रवेश कर रहा है जहां उनके पास खर्च करने की क्षमता (Spending Power) भी है और बेहतर जीवन जीने की इच्छा भी। टिकाऊ उत्पादों और प्रीमियम सेवाओं की पेशकश करने वाली कंपनियों के लिए यह एक बहुत बड़ा और आकर्षक अवसर है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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