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₹9,800 करोड़ की और गिरावट! लगातार तीसरे हफ्ते गिरा विदेशी मुद्रा भंडार

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी गिरावट फॉरेन करेंसी असेट्स (FCA) में दर्ज की गई, जो करीब 1.20 अरब डॉलर घट गया। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी 119 मिलियन डॉलर की कमी आई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा रिजर्व में 13 मिलियन डॉलर की गिरावट देखी गई।

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Foreign reserve exchange (Pic Credit: istock)

Photo : iStock

Foreign Currency Reserve: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार तीसरे हफ्ते गिरा है। 18 जुलाई 2025 को खत्म हुए सप्ताह में इसमें करीब 1.18 अरब डॉलर (लगभग ₹9,800 करोड़) की गिरावट आई है। अब भारत का कुल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व घटकर 695.49 अरब डॉलर रह गया है, जबकि इससे पहले यह 704.88 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था (सितंबर 2024 में)।

क्या-क्या घटा?

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी गिरावट फॉरेन करेंसी असेट्स (FCA) में दर्ज की गई, जो करीब 1.20 अरब डॉलर घट गया। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी 119 मिलियन डॉलर की कमी आई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा रिजर्व में 13 मिलियन डॉलर की गिरावट देखी गई।

क्या बढ़ा?

पिछले सप्ताह भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 18 जुलाई को समाप्त सप्ताह में सोने के भंडार में 150 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई। हालांकि इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें 737 मिलियन डॉलर की गिरावट आई थी, जबकि 4 जुलाई को 342 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। अब भारत का कुल स्वर्ण भंडार बढ़कर 84.499 अरब डॉलर हो गया है।

क्यों घट रहा है रिजर्व?

इस गिरावट की मुख्य वजह फॉरेन करेंसी एसेट्स और SDR में आई कमी है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं (जैसे यूरो, पाउंड, येन) के कमजोर होने का भी असर पड़ता है।

क्या है इसका मतलब?

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट का मतलब है कि भारत को अपने आयात या विदेशी कर्ज चुकाने में थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है। हालांकि, अभी भी भारत के पास पर्याप्त रिजर्व है, लेकिन लगातार गिरावट चिंता की बात जरूर है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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