India Economy Growth : मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताओं का संतोषजनक ढंग से सामना किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
एजेंसियों ने बढ़ाई भारत की रेटिंग
नागेश्वरन ने ‘भारत समुद्री सप्ताह’ (IMW) में कहा कि तीन वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने हाल ही में भारत की साख में सुधार किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि भारत अपनी मौजूदा विकास गति बनाए रखता है तो जल्द ही ‘ए’ रेटिंग श्रेणी में शामिल हो सकता है।
नीति सुधारों ने दी अर्थव्यवस्था को मजबूती
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सीईए ने कहा कि आयकर में राहत, जीएसटी को युक्तिसंगत बनाना और अन्य नीतिगत उपायों ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। इसके चलते वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान करीब 7 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ‘आरामदायक स्थिति’
नागेश्वरन ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के समय पर उठाए गए कदमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘‘आरामदायक स्थिति’’ में रखा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शुल्क और आर्थिक घटनाक्रमों से निपटने में भारत ने लचीलापन दिखाया है।
कुल संसाधन जुटाने में 28.5% वार्षिक वृद्धि
बैंक लोन ग्रोथ में सुस्ती की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए नागेश्वरन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में कुल संसाधन जुटाने की स्थिति को देखना जरूरी है। इसमें गैर-बैंक ऋणदाता, वाणिज्यिक पत्र, इक्विटी बाजार और जमा प्रमाणपत्र जैसे माध्यम शामिल हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में कुल संसाधन जुटाने में 28.5% सालाना वृद्धि हुई है।
आरबीआई के कदमों से तरलता सुनिश्चित
नागेश्वरन ने कहा कि आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती और नकदी प्रवाह से जुड़े कदम उठाकर अर्थव्यवस्था में पर्याप्त धन उपलब्धता सुनिश्चित की है।
समुद्री क्षेत्र को 300 अरब डॉलर की जरुरत
इसी कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के चेयरमैन के. राजारामण ने कहा कि पोत-परिवहन, बंदरगाह और समुद्री उद्योग को लगभग 300 अरब अमेरिकी डॉलर की धनराशि की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इस पूंजी को जुटाने के लिए ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) एक उत्कृष्ट मंच साबित हो सकता है।
