Mountain Radars : रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को भारतीय वायु सेना के लिए दो नए माउंटेन रडार और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे की खरीद के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ 1,950 करोड़ रुपये की डील पर हस्ताक्षर किए। यह कदम देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
माउंटेन रडार क्या है?
माउंटेन रडार वह रडार सिस्टम है जिसे पहाड़ों पर लगाया जाता है। यह रडार हवाई क्षेत्र में किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध गतिविधियों को दूर से पहचानने में सक्षम होता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन रडारों के सक्रिय होने से देश की हवाई सुरक्षा में काफी सुधार होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत होगी।
स्वदेशी डिजाइन और निर्माण
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस डील के तहत खरीदे जाने वाले माउंटेन रडार को डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार विकास प्रतिष्ठान ने देश में ही डिजाइन और विकसित किया है। इसका निर्माण भारतीय सरकारी कंपनी बीईएल करेगी। मंत्रालय ने कहा कि इससे देश विदेशी उपकरणों पर कम निर्भर करेगा और स्वदेशी तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
डील और लागत
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह डील करीब 1,950 करोड़ रुपये का है। इसमें रडार के अलावा उससे जुड़े सभी उपकरण और आवश्यक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। मंत्रालय ने बताया कि डील पर हस्ताक्षर करने के बाद इन रडारों की तैनाती और संचालन जल्द ही शुरू होगा।
देश की हवाई सुरक्षा में सुधार
एक्सपर्ट्स के अनुसार, माउंटेन रडार की मदद से वायु सेना सीमा पर किसी भी तरह की हवाई गतिविधियों पर नजर रख सकेगी। यह रडार विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई खतरे का पता लगाने में सहायक होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इससे देश की समग्र रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी।
विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी
रक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि इस खरीद से भारत को विदेशी रडार और उपकरणों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होगी। देश के वैज्ञानिक और इंजीनियरों द्वारा विकसित यह रडार तकनीक भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगी।
भारत के लिए यह कदम न केवल वायु सुरक्षा को मजबूत बनाएगा बल्कि देश की रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगा। माउंटेन रडार की खरीद और तैनाती से भारतीय वायु सेना की निगरानी और सुरक्षा क्षमताएं और बेहतर होंगी।
