AI Impact on Share Market: पिछले लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार एक रेंज बाउंड ट्रेड कर रहा है। निफ्टी 50 22000 से 24000 के बीच फंसा हुआ है। वहीं, इस दौरान दुनियाभर के बाजारों में शानदार तेजी देखी गई है। क्या आपको पता है कि भारतीय बाजार क्यों पीछे रह गए और इसकी वजह क्या है? आपको जानकार शायद आश्चर्य होगा कि इसकी वजह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) हैं। आइए समझते हैं कि कैसे एआई ने भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार रोकी है।
ग्लोबल शेयर बाजारों में उछाल
आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में इंडेक्स युद्ध पूर्व स्तर से 1-8% ऊपर हैं। हाल ही में नैस्डैक (Nasdaq) ने अपना नया रिकॉर्ड बनाया है। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) जो कच्चे तेल के बड़े आयातक होने के कारण युद्ध की शुरुआत में 13-19% तक गिर गए थे, अब 2-4% की बढ़त पर हैं। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी और सेंसेक्स 27 फरवरी के स्तर से अब भी 5-6% नीचे हैं। हालांकि निचले स्तरों से 11% की रिकवरी हुई है, लेकिन वैश्विक बाजारों के मुकाबले प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है।
AI की रेस में शामिल नहीं होना पड़ा भारी?
भारतीय बाजारों के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण है AI बूम में हिस्सेदारी की कमी। पिछले एक साल में जहाँ नैस्डैक 42%, निक्केई 70% और कोस्पी 2.5 गुना बढ़ा है, वहीं प्रमुख भारतीय इंडेक्स 1% नीचे गिरे हैं। बता दें कि अमेरिका, जापान और कोरिया के बाजारों में तेजी का इंजन 'AI स्टॉक्स' हैं।
कुछ निवेशकों ने भारतीय स्टॉक्स को 'रिवर्स AI प्ले' माना था। यानी यह उम्मीद कि AI बबल फटने पर कम एक्सपोजर के कारण भारतीय बाजार सुरक्षित रहेंगे। लेकिन फिलहाल यह रणनीति नाकाम साबित हो रही है। Nvidia के हालिया नतीजों ने AI बबल की अटकलों को फिलहाल शांत कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों को और मजबूती मिली है।
विदेशी निवेशकों का भारत से मोहभंग हुआ
भारतीय कंपनियों में AI निवेश की कमी और ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भरता ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया है। मार्च में 12.7 बिलियन डॉलर की निकासी के बाद, अप्रैल में अब तक विदेशी निवेशकों ने 4.7 बिलियन डॉलर के शेयर बेचे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने रही सही कसर को पूरा कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशकों का रिटर्न कम हो गया है। इसके चलते विदेशी निवेश भारत से पैसा निकल रह हैं, वहीं जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया में निवेश बढ़ रहा है। जापान के वित्त मंत्रालय के अनुसार, मार्च के अंत से अब तक विदेशी निवेशकों ने 58 बिलियन डॉलर के जापानी शेयर खरीदे हैं।
टेक स्टॉक्स का भारी वजन
दुनिया के टॉप परफॉर्मिंग इंडेक्स के स्ट्रक्चर को देखें, तो उनमें टेक्नोलॉजी और AI से जुड़ी कंपनियों का वेटेज बहुत ज्यादा है। भले ही ऊर्जा की बढ़ती कीमतें मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ा रही हैं, लेकिन इन टेक आधारित इंडस्ट्रीज की आंतरिक मांग इतनी मजबूत है कि वे हर झटके को झेल पा रही हैं। भारत में AI की कोई बड़ी भूमिका नहीं है और हम 'एनर्जी शॉक' के प्रति संवेदनशील हैं। यही अंतर हमारे बाजार के प्रदर्शन में दिख रहा है।
