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अप्रैल-सितंबर के दौरान भारतीय कंपनियों की फाइनेंशियल सेहत हुई कमजोर, आगे और खराब हो सकती है हालत

Indian Companies Financial Condition: क्रिसिल ने कहा है कि भारतीय कॉरपोरेट जगत की वित्तीय सेहत चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में थोड़ी नरम हुई है और दूसरी छमाही में इसमें और गिरावट आने की आशंका है।

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भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति हुई खराब

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KEY HIGHLIGHTS
  • भारतीय कंपनियों की फाइनेंशियल सेहत कमजोर
  • आगे भी कई हैं चुनौतियां
  • क्रिसिल ने बताया क्या हैं रिस्क

Indian Companies Financial Condition: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) ने कहा है कि भारतीय कॉरपोरेट जगत की वित्तीय सेहत चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में थोड़ी नरम हुई है और दूसरी छमाही में इसमें और गिरावट आने की आशंका है।

देशभर की करीब 6,500 कंपनियों की रेटिंग करने वाली क्रिसिल रेटिंग्स ने यह अनुमान कंपनियों के कर्ज अनुपात यानी उनकी रेटिंग में सुधार (अपग्रेड) और गिरावट (डाउनग्रेड) को ध्यान में रखते हुए लगाया है।

कितना है कंपनी जगत का कर्ज अनुपात

हालांकि रेटिंग एजेंसी ने साफ किया कि आगे भी कर्ज अनुपात एक से ऊपर ही बना रहेगा। इसका मतलब है कि कंपनियों की रेटिंग में सुधार की संख्या गिरावट से अधिक रहेगी। एजेंसी के मुताबिक, अप्रैल-सितंबर 2024 में 443 अपग्रेड किए गए जबकि डाउनग्रेड की संख्या 232 रही। इस तरह भारतीय कंपनी जगत का कर्ज अनुपात 1.91 रहा जो इससे पहले की छमाही में 2.19 था।

पहले से था अनुमान

क्रिसिल के प्रबंध निदेशक गुरप्रीत छटवाल ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में कंपनियों की वित्तीय सेहत का नरम होने की संभावना पहले से ही थी। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़ाने से कॉरपोरेट जगत को सकारात्मक कर्ज अनुपात हासिल करने में मदद मिल रही है।

हालांकि, छटवाल ने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बारिश के असमान वितरण से भारतीय कॉरपोरेट जगत की वित्तीय सेहत के लिए चुनौती बरकरार है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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