Gold Silver Import Crisis : एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि गोल्ड की खरीद कम करें। वहीं, देश के बैंकों ने महीनों के बाद फिर से गोल्ड और सिल्वर का आयात शुरू कर दिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 3% IGST विवाद के कारण एक महीने से रुका सोना-चांदी आयात अब फिर शुरू हो गया है।
बैंकों ने टैक्स भुगतान मानने के बाद मई में 9 टन सोना और 34 टन चांदी आयात के लिए क्लियर कराई है। हालांकि, बढ़ते आयात से ट्रेड डेफिसिट और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। असल में अप्रैल की शुरुआत में सरकार द्वारा बुलियन आयात पर IGST भुगतान मांगने के बाद कई बैंकों ने शिपमेंट रोक दिए थे।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है और देश में आयात होने वाले रिफाइंड गोल्ड का बड़ा हिस्सा बैंकों के जरिए आता है। ऐसे में आयात रुकने का असर सीधे घरेलू सप्लाई और बाजार पर देखने को मिला।
अप्रैल में गोल्ड इंपोर्ट में भारी गिरावट
आयात रुकने का असर अप्रैल के आंकड़ों में साफ दिखाई दिया। ट्रेड अनुमान के मुताबिक अप्रैल में भारत ने केवल करीब 15 टन सोना आयात किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में औसत मासिक आयात लगभग 60 मीट्रिक टन रहा था। खास बात यह रही कि यह गिरावट अक्षय तृतीया जैसे बड़े गोल्ड-खरीदारी सीजन के दौरान आई। बुलियन डीलर्स के अनुसार कई बैंक सरकार से टैक्स छूट पर स्पष्टता मिलने का इंतजार कर रहे थे, जिसके चलते शिपमेंट रोके गए।
अब क्यों शुरू हुआ आयात?
2017 से सरकार हर साल नोटिफिकेशन जारी कर बैंकों को इस टैक्स से छूट देती रही थी। लेकिन नए वित्त वर्ष 1 अप्रैल 2026 से कस्टम अधिकारियों ने IGST भुगतान मांगना शुरू कर दिया। अब बैंकों ने 3% IGST भुगतान की शर्त को मान लिया है, जिसके बाद फिर से कंसाइनमेंट क्लियर होने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मई में अब तक करीब 9 टन Gold और 34 टन Silver क्लियर की जा चुकी है।
रुपए और बढ़ सकता है दबाव
सोना आयात बढ़ने से भारत के ट्रेड डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि बुलियन खरीदारी मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होती है। यही वजह है कि बढ़ते आयात को रुपए के लिए भी निगेटिव माना जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक गोल्ड खरीदारी कम करने की अपील की थी ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
घरेलू बाजार में मांग कमजोर
हालांकि आयात फिर शुरू हो गया है, लेकिन घरेलू बाजार में मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। इस सप्ताह डीलर्स ने आधिकारिक घरेलू कीमतों के मुकाबले 17 डॉलर प्रति औंस तक डिस्काउंट ऑफर किया। ट्रेडर्स का कहना है कि सप्लाई स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन ज्वेलरी डिमांड में अभी मजबूत रिकवरी नहीं दिख रही। अप्रैल में गोल्ड डोर (Gold Dore) यानी अर्ध-शुद्ध सोने के आयात पर भी असर पड़ा था क्योंकि कुछ आयात मंजूरियों में देरी हुई थी।
क्या है आगे का बड़ा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोल्ड आयात लगातार बढ़ता रहा तो चालू खाते के घाटे (CAD) और रुपए दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, सप्लाई सामान्य होने से घरेलू बाजार में कीमतों का प्रीमियम घट सकता है।
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