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Hormuz में खतरा बढ़ा! IOC और MRPL ने रोकी इराकी तेल खरीद, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह से होर्मुज स्ट्रेट से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर थम गई है। भारत ने भी ईराकी तेल की खरीद को रोक दिया है।

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क्रूड ऑयल में तेजी

Hormuz Strait में लगातार टैंकरों पर हमलों के बाद भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने इराक से तेल की लोडिंग रोक दी है। अब रूस, सऊदी अरब और UAE से सप्लाई बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि देश की दो बड़ी सरकारी रिफाइनरियों Indian Oil Corporation (IOC) और Mangalore Refinery and Petrochemicals (MRPL) ने इराक से कच्चे तेल की लोडिंग फिलहाल रोक दी है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि IOC ने करीब 20 लाख बैरल क्षमता वाले VLCC (Very Large Crude Carrier) Lila Jamnagar जहाज से इराकी तेल लोड करने की योजना रद्द कर दी है। कंपनी का मानना था कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल लेकर Hormuz Strait से गुजरना अब बेहद जोखिम भरा हो गया है। इसी तरह MRPL ने भी इराक से तेल उठाना फिलहाल बंद कर दिया है। दरअसल, पिछले कुछ समय में Hormuz Strait से गुजरने वाले कई कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं। इससे बीमा लागत बढ़ गई है और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी काफी बढ़ गई है।

भारतीय नाविकों को भी चेतावनी

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के शिपिंग मंत्रालय ने जहाज मालिकों और मैनिंग एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगली सूचना तक भारतीय नाविकों को Hormuz Strait से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात न किया जाए। यह कदम समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की बढ़ती चिंता को दिखाता है।

अब कहां से आएगा तेल?

इराक से दूरी बनाने के साथ ही भारत वैकल्पिक स्रोतों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। सबसे बड़ा फायदा रूस से मिल रहा है। Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने भारत रूस से करीब 24.5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात कर रहा है, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है। UAE और सऊदी अरब से भी सप्लाई जारी है। इन दोनों देशों के पास ऐसी पाइपलाइनें हैं, जिनके जरिए वे अपने कुछ तेल निर्यात को Hormuz Strait से बचाकर सीधे दूसरे बंदरगाहों तक पहुंचा सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतें फिर चढ़ीं

वैश्विक बाजार में Brent Crude की कीमत 92.63 डॉलर प्रति बैरल के तक पहुंच गई है। जबकि, WTI Crude Oil 85.75 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया है। होर्मुज के अलावा अब लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों की समुद्री नाकेबंदी के कारण तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य-पूर्व से सप्लाई और प्रभावित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?

फिलहाल सरकार की तरफ से या तेल कंपनियों की तरफ से ऐसी किसी तरह की योजना को सामने नहीं रखा गया है। लेकिन, लंबे समय तक क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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