US Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। सोमवार को Brent Crude 3% से अधिक चढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी WTI Crude Oil भी करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पिछले सप्ताह भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क में लगभग 16% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और गहरा गया है। इसका सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही बंद होने की वजह से पर पड़ रहा है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल का समुद्री व्यापार होता है। इस रणनीतिक जलमार्ग दोनों देशों के बीच युद्ध फिर भड़कने की वजह से फिर से बंद हो गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
अमेरिका और ईरान लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। अमेरिका ने जहां ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी लागू करने की बात कही है। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाएगा। इन घटनाओं से तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों बंद?
अमेरिका ने ईरानी से निकलने वाले जहाजों पर ब्लॉकेड कर रखा है। वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने भी उसकी मंजूरी के बिना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
जहाजों की आवाजाही भी घटी
उपलब्ध शिपिंग डेटा के मुताबिक रविवार को इस जलमार्ग से केवल 4 जहाज गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 8 थी। वहीं, ओमान के पास एक जहाज में आग लगने की भी सूचना मिली, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों के मुताबिक दोहरी नाकेबंदी के बीच इस क्षेत्र से तेल निर्यात कितनी मात्रा में जारी रह पाएगा। उनके अनुसार बाजार अभी भी आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर को कम आंक रहा है, जबकि वैश्विक तेल भंडार पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तरों में हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 90 डॉलर या उससे ऊपर बना रहता है, तो इसके कई असर देखने को मिल सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा महंगाई में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ सकता है।
