भारत का आरईआईटी मार्केट कैप 2030 तक 25 अरब डॉलर पहुंचने की उम्मीद
- Edited by: गौरव तिवारी
- Updated Jan 10, 2026, 06:41 PM IST
रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर लिस्टेड रियल एस्टेट वैल्यू में आरईआईटी की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत है, जो कि भारत में यह केवल 19 प्रतिशत है। यह दिखाता है कि भारत के बाजार में विकास की काफी संभावनाएं और जगह है।
वैश्विक स्तर पर लिस्टेड रियल एस्टेट वैल्यू में आरईआईटी की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत है। (फोटो क्रेडिट-iStock)
भारत का रिटल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) मार्केट आने वाले समय में तेजी से बढ़ेगा। इसकी वजह देश के लिस्टेड रियल एस्टेट वैल्यू में आरईआईटी की हिस्सेदारी मात्र 19 प्रतिशत होना है। यह जानकारी शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। रियल एस्टेट सेवा फर्म वेस्टियन की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि आरईआईटी का मार्केटकैप करीब 38.88 प्रतिशत बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो कि 2025 में करीब 18 अरब डॉलर था। इस दौरान आरईआईटी आधारित एसेट्स की वैल्यू बढ़कर 16 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है, जो कि फिलहाल 8.2 लाख करोड़ रुपए है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर लिस्टेड रियल एस्टेट वैल्यू में आरईआईटी की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत है, जो कि भारत में यह केवल 19 प्रतिशत है। यह दिखाता है कि भारत के बाजार में विकास की काफी संभावनाएं और जगह है। रिपोर्ट में कहा गया, "रिटेल और अल्टरनेटिव एसेट क्लास के विस्तार के साथ, भारत दुनिया भर में सबसे डायनामिक आरईआईटी बाजारों में से एक के रूप में उभरने के लिए अच्छी स्थिति में है।"
इसमें कहा गया है कि इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग आरईआईटी और इनविट में मौके 2030 तक 0.7 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है, जो ग्लोबल बदलावों को दिखाता है जहां लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर कोर आरईआईटी सब-सेक्टर बनाते हैं।
भारत में अभी पांच लिस्टेड आरईआईटी हैं जिसमें चार ऑफिस एसेट्स पर फोकस्ड हैं और एक रिटेल सेगमेंट में है। वेस्टियन के सीईओ, श्रीनिवास राव ने कहा, "जैसे-जैसे मार्केट विकसित हो रहा है, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, इंडस्ट्रियल पार्क और वेयरहाउसिंग जैसे एसेट क्लास, परिपक्व आरईआईटी मार्केट के साथ अलाइन होने वाले स्केलेबल, यील्ड देने वाले मौके देते हैं।"
ऑफिस एसेट्स के लिस्टेड पोर्टफोलियो 135 मिलियन वर्ग फुट से अधिक में फैले हुए हैं, जिन्हें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), टेक्नोलॉजी फर्मों और बीएफएसआई कंपनियों से अनुमानित लीजिंग डिमांड का फायदा मिल रहा है, जिससे 5-7 प्रतिशत की स्टेबल यील्ड मिल रही है।
(इनपुट- आईएएनएस)
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