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निर्मला सीतारमण ने क्यों कहा- देश को विश्वस्तरीय बैंकों की जरुरत

Bank News: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि भारत को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की आवश्यकता है ताकि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस दिशा में सरकार ने काम शुरू कर दिया है और इस पर आरबीआई तथा बैंकों के साथ चर्चा जारी (Bank se judi khabren) है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Bank News : देश को बड़े और वैश्विक स्तर के बैंकों की आवश्यकता पर जोर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को कहा कि इस दिशा में सरकार ने काम शुरू कर दिया है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) तथा बैंकों के साथ इस पर सक्रिय रूप से चर्चा चल रही है। वह 12वें ‘एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स कॉन्क्लेव 2025’ को संबोधित कर रही थीं (Bank se judi khabren)।

न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा के मुताबिक सीतारमण ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और इस विकास को गति देने के लिए देश को ऐसे बैंक चाहिए जो न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करें बल्कि वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने कहा कि देश को कई बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है। सरकार इस दिशा में विचार कर रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हम आरबीआई और बैंकों के साथ इस पर बातचीत कर रहे हैं।

वित्त मंत्री ने वित्तीय संस्थानों से उद्योग जगत के लिए कर्ज प्रवाह को बढ़ाने और व्यापक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मजबूत बैंकिंग नेटवर्क उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक है।

सीतारमण ने भरोसा जताया कि हाल ही में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में की गई कटौती से बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग न केवल उत्पादन में वृद्धि करेगी, बल्कि समग्र आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित है। पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में पांच गुना वृद्धि की है। इससे सड़कों, रेल, बंदरगाहों, ऊर्जा और शहरी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सीतारमण ने बताया कि 2014 से अब तक सरकार ने व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए कई संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं, जिससे भारत निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। उन्होंने कहा कि सुधारों के कारण निवेश माहौल बेहतर हुआ है और उद्यमशीलता को बढ़ावा मिला है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। इसके अलावा, पिछले दशक में 25 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया, जो सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों की सफलता को दर्शाता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी-आधारित विकास मॉडल पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भारत में डेटा (इंटरनेट) की लागत आज घटकर 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है, जबकि 2014 में यह 300 रुपये प्रति जीबी थी। इस बदलाव ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और सामान्य नागरिक को सशक्त बनाया है।

सीतारमण ने अंत में कहा कि भारत अगले दशक में एक “विकसित अर्थव्यवस्था” बनने की दिशा में अग्रसर है और इसके लिए वित्तीय क्षेत्र की मजबूती, डिजिटल नवाचार और समावेशी विकास तीनों पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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